Month: July 2020

निर्मल रचनाकार-प्रीति कुमारीनिर्मल रचनाकार-प्रीति कुमारी

निर्मल रचनाकार हिन्दी साहित्य के वे निर्मल रचनाकार, जिन्होंने दिया ज्ञान को है ऐसा आकार जिनकी रचना का है ऐसा आधार जिससे मिट जाए जीवन का अन्धकार जो लिखते हैं शब्दों के छन्द, नाम है उनका मुन्शी प्रेमचन्द । नहीं है उनके जैसा कोई साहित्यकार जिसने हमेशा अपनी रचनाओं से मानवीय संवेदनाओं से करवाया है […][...]

READ MOREREAD MORE

प्रेमचंद-अवनीश कुमारप्रेमचंद-अवनीश कुमार

प्रेमचंद क्यों है कथासम्राट का जन्मदिन उपेक्षित क्या उनकी रचनाएँ  अब है दम तोड़ती क्या उस कलमकार की रचना में इतना बस भी दम नही कि कर सके हामिद बन अभावग्रस्त में खो रहा बचपन का चरित्र चित्रण क्या उसकी कहानी में अब नही रहा मंत्र फूकने की ताकत होरी का चित्रण क्या समाज मे […][...]

READ MOREREAD MORE

कलम के सिपाही को शत-शत नमन-रानी कुमारीकलम के सिपाही को शत-शत नमन-रानी कुमारी

कलम के सिपाही को शत-शत नमन  तस्वीरें नहीं बदलीं ओ संवेदना के शिखर पुरुष ! कलम के सच्चे सिपाही ! ओ कथा सम्राट! तुमने समाज की जिन सड़ी-गली रूढ़ियों से आती सड़ांध को अंतिम पंक्ति में उपेक्षित पड़े जनसामान्य की पीड़ा को स्त्री जीवन की त्रासदी को देख, समझ और महसूस कर तुम बने थे […][...]

READ MOREREAD MORE

आदर्श शिक्षक-गौतम भारतीआदर्श शिक्षक-गौतम भारती

आदर्श शिक्षक हे मनुष्य निर्माता, राष्ट्र निर्माता पग पग आपकी दरकार है। आप हैं हमारे आदर्श शिक्षक, आपकी जय जय कार है ।। आपकी जय जय कार है । शिक्षण पद्धति की आधारशिला, आप ही रखने वाले हो। मिशाल है आपकी कार्यक्षमता, आप ही सारे गुण वाले हो। देखकर इच्छाशक्ति, सहकारिता भी-2 चरणस्पर्श सौ सौ […][...]

READ MOREREAD MORE

पाक नसीहत प्रभात रमणपाक नसीहत प्रभात रमण

पाक नसीहत भारत ने तुमको जन्मा है ये देश तुम्हारी माता है इसको तो कोई कष्ट नही फिर तुम्हे क्यों नही भाता है ? अपनी माँ से अलग होकर कैसे तू रह पाता है ? अपना परिवार बना डाला अपनी सभ्यता भूलकर नया संस्कार बना डाला पहले तो थे हिंदुस्तानी अब हो गए तुम पाकिस्तानी […][...]

READ MOREREAD MORE

गुरु की महत्ता-खुशबू कुमारीगुरु की महत्ता-खुशबू कुमारी

गुरु की महत्ता जब लगे कि सारे रास्ते हो गए बंद जिंदगी से हो गए तंग छिड़ गई हो आपस में जंग तब खुद को थोड़ा संभालना एकांत बैठना आंखे बंद कर थोड़ा मुस्कुराना अपने गुरु को याद कर सब कुछ उनको समर्पित करना फिर देखना जीवन में एक नई राह मिलेगी जिस पर चल […][...]

READ MOREREAD MORE

शिक्षक-कुमकुम कुमारीशिक्षक-कुमकुम कुमारी

शिक्षक हाँ मैं एक शिक्षक हूँ। शिक्षक होने का दंभ मैं भरता हूँ। राष्ट्र निर्माता होने पे गर्व मैं करता हूँ। हाँ मैं एक शिक्षक हूँ। यह सच है कि मैंने, बच्चों को ख़ूब पढ़ाया। पढ़ा लिखा कर उन्हें डॉक्टर औऱ इंजीनियर बनाया। पढ़े लिखे लोगों से इस जहाँ को सजाया। पर क्या सच में […][...]

READ MOREREAD MORE

आत्मदृष्टि बदल दे सृष्टि-मधुमिताआत्मदृष्टि बदल दे सृष्टि-मधुमिता

  आत्मदृष्टि बदल दे सृष्टि हे आत्माओं कर लो परमात्मा से प्यार वो प्यार का सागर देता हमें केवल प्यार ही प्यार अपने दुःख का कारण न समझ उनको, वो तो केवल करते सबका कल्याण। माया ने जन्म-जन्म भटकाया, अब तो बात मेरी मान। आत्म दृष्टि से पहचान एक-दूजे को, छोड़ भी दे मिथ्या देह […][...]

READ MOREREAD MORE

मानव जीवन-देव कांत मिश्रमानव जीवन-देव कांत मिश्र

मानव जीवन मानव जीवन बड़ा धन्य है इसे हम बताते चलें। अपने सत्कर्मों से नित इसे हम सजाते चलें।। देखो! बड़े भाग से मिला यह सुन्दर मानुष तन। अपने शुभ सदाचरण से इसे हम महकाते चलें।। पल-पल मृत्यु की ओर नित बढ़ रहा, यह जीवन। सुपथ, प्रेम, भक्ति का सद्ज्ञान हम लुटाते चलें।। दीनों, दरिद्रों […][...]

READ MOREREAD MORE

संभव नहीं – ब्रजराज चौधरीसंभव नहीं – ब्रजराज चौधरी

  संभव नहीं छोड़ दें हर कुछ बस अपनी ही खुशी के लिए ये तो संभव ही नहीं है ,हर किसी के लिये। माना कि घर में ही रहना है ,बहुत जरूरी आज मगर मुसीबतों से कहाँ,सबों को मिलती निजात, मुसीबत के मारों को कैसे छोड़ दें किसी के लिए छोड़ दे हर कुछ बस […][...]

READ MOREREAD MORE