Month: August 2020

नारीशक्ति-स्वाति सौरभनारीशक्ति-स्वाति सौरभ

नारीशक्ति जब जब औरत माँ बनती है, तब तब मौत से वो लड़ती है। जब बेटी से बहू बनती है, दो परिवार का मान रखती है। त्याग बलिदान का मूरत है नारी, ममता की सूरत सी प्यारी। पहनी जो चूड़ी अपने हाथ में, तो ये है उसके संस्कार में। नारी अगर चुप खड़ी है, तो […][...]

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प्रगति-मधु कुमारीप्रगति-मधु कुमारी

प्रगति हो भविष्य की तुम धरोहर सुन लो ओ देश के नोनिहाल प्रगति के पथ पर है नित्य तुम्हें नए नए कीर्तिमान स्थापित करना नित्य, निरंतर है तुम्हें बढ़ना, बस बढ़ते हीं जाना न रुकना, न थकना कभी बस है चलना, चलते हीं जाना जीवन के कर्तव्य पथ पर ऊँची-नीची मुश्किल राहों पर कर कल्पना […][...]

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प्रेम बनाये सभी काम-विनय कुमार वैश्कियारप्रेम बनाये सभी काम-विनय कुमार वैश्कियार

प्रेम बनाये सभी काम प्रेम प्यासी हर काया, प्रेम ही सबको भाया, प्रेम पास सब लाया, प्रेम ही लुटाइये। बिगड़े काम बने है, फ़िर काहे को तने है संकट जब घने है, प्रेम से उबारिये। अपने जब रूठें हो, क्यों सोचें कोई झूठे हो संदेह की लकीरें हो, प्रेम से मिटाइये। जग में फैला है […][...]

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कौन कहते हैं बच्चे पढ़ते नहीं-आँचल शरणकौन कहते हैं बच्चे पढ़ते नहीं-आँचल शरण

कौन कहते हैं बच्चे पढ़ते नहीं कौन कहते हैं बच्चे पढ़ते नहीं, पर सत्य तो ये है कि हम उन्हें समझते नहीं। जब बच्चे शुरू शुरू में विद्यालय आते है, तब सच तो ये है कि वो माँ के आँचल और अपने परिवेश को भूलते नहीं । उन्हें उस वक़्त कॉपी-किताब और विद्यालय के वातावरण […][...]

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अब क्या-प्रभात रमणअब क्या-प्रभात रमण

अब क्या अब क्या गाँव की शान ढूंढते हो ? अपनी सभ्यता का सम्मान ढूंढते हो बाँस के मचान का दलान ढूंढते हो बबूल के पेड़ में आम ढूंढते हो बाढ़ में सब तो डूब गया है पानी भरे खेत में धान ढूंढते हो सारे रिश्ते खतम हो गए हैं अब कहाँ मैत्री का पान […][...]

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स्वतंत्र-अश्मजा प्रियदर्शिनीस्वतंत्र-अश्मजा प्रियदर्शिनी

स्वतंत्र ऐ नादान इंसान, तुम मुझे जाने कैसे प्यार करते थे। अपनी इच्छा से जाने क्या क्या खिलाया करते थे । कभी पुचकारते कभी सहलाते रहा करते थे। फिर भी में खुश नहीं रह सका क्योंकि तुम मुझे पिंजरे में कैद रखा करते थे। तुम्हे डर था मैं उड़ न जाऊँ तुमसे बिछड़ न जाऊँ […][...]

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कौन कहते कि बच्चे पढ़ते नहीं-नूतन कुमारीकौन कहते कि बच्चे पढ़ते नहीं-नूतन कुमारी

कौन कहते कि बच्चे पढ़ते नहीं बुद्धिजीवी होना कुछेक की मुद्दत होती है, अनुकरण करना बच्चों की फितरत होती है, शिद्दत से हम उन्हें समझाते नहीं, कौन कहते हैं बच्चे पढ़ते नहीं ? बच्चे को रखें सोशल मीडिया से दूर, खुद को भी करें इसके लिए मजबूर, एकाग्रता की सीख हम दे पाते नहीं, कौन […][...]

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छत पर पाठशाला-विजय सिंह नीलकण्ठछत पर पाठशाला-विजय सिंह नीलकण्ठ

छत पर पाठशाला छत पर बैठा है लंगूर  हाथ में उसके है अंगूर  पास में बैठा एक लंगूर  बजा रहा बाजा संतूर। देखने में बच्चे हैं मशगूल  आनंद मिल रहा है भरपूर  बड़े बुजुर्ग भी उत्सुक होकर  देखने को हुए मजबूर। तभी एक आई बंदरिया  हाथ में उसके पड़े हैं खड़िया  जो दिखते सफेद वह […][...]

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गणित सीखें-शफक फातमागणित सीखें-शफक फातमा

गणित सीखें आओ बच्चों सीखें गणित इसमें है अब सबका हित। इकाई दहाई पर पहले ध्यान फिर हो जोड़ घटाओ का ज्ञान। गुणा के बाद भाग की क्रिया सरलीकरण की यही प्रक्रिया। ज्यामिति का खेलो खेल वर्ग त्रिभुज का करो अब मेल। भिन्न में होते अंश और हर सजाओ इन्हें अब क्रम पर। घड़ी न […][...]

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कोरोना से जंग-लवली वर्माकोरोना से जंग-लवली वर्मा

कोरोना से जंग थम सी गयी है जिंदगी, रुक गए हैं जैसे कदम। जिनसे मिल लिया करते थे हमेशा, उनसे मिलना हुआ दुर्गम।। कोरोना ने जन-जीवन को किया त्रस्त, जाने कितनों के सपने हो गए ध्वस्त। कोरोना ने मानव को मानव से किया दूर, सभी हुए अपनों से, अलग रहने को मजबूर।। मुश्किलें तो आती […][...]

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