Month: October 2020

अनमोल जिन्दगी-डाॅ अनुपमा श्रीवास्तवअनमोल जिन्दगी-डाॅ अनुपमा श्रीवास्तव

अनमोल जिन्दगी जाए न व्यर्थ जिदंगी यह बड़ा “अनमोल” है, इस धरा पर तेरा नहीं तेरे कर्म का ही “मोल” है । मिल न पाये क्या पता “जीवन” तुझको फिर कभी , “कीमत” समय की तू समझ जो करना है कर ले अभी । याद रखती दूनियाँ उनको जिसने खुद को मिटा दिया, परवाह नहीं […][...]

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नर ही नारायण-अर्चना गुप्तानर ही नारायण-अर्चना गुप्ता

नर ही नारायण छोड़ पुष्पों की सेज सुहानी जो काँटों का बिस्तर अपनाए कर्मपथ पर सतत चलकर जो सबका पथ प्रदर्शक बन जाए परहित समर्पित वह नर ही जीवन में नारायण बन पाए। संघर्षों की अग्नि में तपकर जो निशदिन कुंदन बन जाए तप, त्याग, प्रेम, दान व सेवा परोपकार का हर पाठ पढ़ाए परहित […][...]

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इंटरनेट का परिचय-अपराजिता कुमारीइंटरनेट का परिचय-अपराजिता कुमारी

इंटरनेट का परिचय इंटरनेट को कहते अंतरजाल यहाँ है सूचनाओं का भंडार एक दूसरे से जुड़कर बना महाजाल दुनिया भर में घुमता रहता Text, Image, Mp3, Video और Information, Data का महाजाल सारे डाटा Information Router और Server के जरिये करते, आना जाना और जोड़े रखते पुरे विश्व को एक दूसरे से इस महाजाल से […][...]

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प्रेमचंद-आँचल शरणप्रेमचंद-आँचल शरण

प्रेमचंद एकतीस जुलाई अठारह सौ अस्सी को, “माँ” आनंदी के घर जन्में पुत्र महान। पिता अजायब राय का उन्होंने बढ़ाया पूरा मान, और बचपन में उन्होंने रखा उनका नाम धनपत राय, जो आगे चलकर बने साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद महान। माता-पिता के ही नहीं, वे देश के हित में भी दिया था अपना योगदान। पर निजी […][...]

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नन्हें बच्चे-कुमारी अनु साहनन्हें बच्चे-कुमारी अनु साह

नन्हें बच्चे हम नन्हें बच्चे काफी श्रम करते हैं आसमान में उडने का दम भरते हैं । मेहनत से हम इतिहास लिखेंगे धरती से आकाश लिखेंगे अपनी मातृभूमि के मस्तक पर विजय का ताज लिखेंगे हम आज ये प्रण करते हैं छोटे छोटे नेत्र है और बडे बडे सपने मुश्किलों से कह दो न आए […][...]

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बुद्ध के आदर्श-अश्मजा प्रियदर्शिनीबुद्ध के आदर्श-अश्मजा प्रियदर्शिनी

बुद्ध के आदर्श बुद्ध के आदशों को मिली दिशाएँ। मंद कंचन सुमधुर बहती शीतल हवाएँ। राजा शुद्धोधन के घर में जन्मा पुत्र महान। इच्छवाकु वंश के, लुम्बिनी की खिली फिजाएँ। माता महामाया, पत्नी यशोधरा, पुत्र पाया राहुल। जिन्हें सोता छोड़ गए, सन्यासी बन गए बाबुल। हाँ यशोधरा के जीवन की कई जफाएँ। शायद वो पा […][...]

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मैं हिम्मत हूँ-विजय सिंह नीलकण्ठमैं हिम्मत हूँ-विजय सिंह नीलकण्ठ

मैं हिम्मत हूँ  धैर्य भी हूँ दवा भी हूँ  मानव जीवन का सब कुछ हूँ  बिन मेरे न कुछ भी संभव  कहलाता मैं हिम्मत हूँ।  मुझसे ही मिलती ताकत है  मुझसे ही मिलती शोहरत है  मानव तो मानव है   मुझपर इटलाता कुदरत है। असाध्य बीमारी वाले भी  मेरे बल पर ही जीते हैं  हार नहीं […][...]

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गुरु-स्नेहलता द्विवेदी आर्यागुरु-स्नेहलता द्विवेदी आर्या

गुरु मात पिता धन मानिये, दियो शरीर बनाय। ता पर माँ ममतामयी, प्रथम गुरु बन धाय।। खेल कूद कर बढ़ रहे, अब देखो कुलराई। शिक्षा शिक्षक के बिना, खोज रहे अकुलाई।। प्रकृति संगति सब लखै, सब मिल देत सिखाय। शिक्षक सब संग जाइके, करते सुगम उपाय।। बिन शिक्षा सब पशु बनें, बिन शिक्षक पशुराय। धन्य […][...]

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दोहे-विनय कुमार ओजदोहे-विनय कुमार ओज

दोहे ऋण न किसी का भूलिए, मत भूलें उपकार। ऋण जो आप उतार दें, मन से जाए भार।। वाणी मरहम भी करे, अरु करती है घाव। वाचा विष मत घोलिये, वन के हो मत दाव।। यौवन धन अरु रूप पे, मत करना अभिमान। रहें नही हैं ये सदा, इसे दौर तू जान।। छल-प्रपंच जो भी […][...]

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दोस्त हमारा इंटरनेट-शालिनी कुमारीदोस्त हमारा इंटरनेट-शालिनी कुमारी

दोस्त हमारा इंटरनेट  इंटरनेट का है ये जमाना इंटरनेट ही दोस्त हमारा इंटरनेट की गलियारों में अब होता है सैर हमारा इंटरनेट से ही जुड़ा हुआ है शिक्षा का संसार हमारा जहाँ हैं भांति-भांति के लोग फिर भी अनोखा है रिश्ता हमारा सभी की अलग है भाषा-संस्कृति फिर भी करना विस्तार ज्ञान का ये लक्ष्य हमारा […][...]

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