Month: December 2020

रिश्ता व मानव जीवन है अनमोल-शालिनी कुमारीरिश्ता व मानव जीवन है अनमोल-शालिनी कुमारी

  रिश्ता  कभी सन्नाटे सा ख़ामोश कभी शोर मचाता ढ़ोल सा.. कभी कुसुमों का स्तवक कभी खिलता बसंत सा.. कभी मासूमियत से भरी कभी अनुरंजित हैं दम्भ सा.. कभी देता हैं अपनेपन का अहसास कभी हिय की अक्षमता सा.. कभी रिश्ते देते हैं तपन कभी तपती रेत में ठंढी बूँद सा.. हर रिश्ता बंदिशों से […][...]

READ MOREREAD MORE

हमारा जीवन-पंकज कुमारहमारा जीवन-पंकज कुमार

हमारा जीवन  जब हम होते छोटे घरों में लगता था जैसे कैद थे हम, बाहर की दुनिया देखी तो घर तो बिल्कुल मंदिर जैसा। जब हम रहते छोटे गांवो में लगता था जैसे पिछड़े थे हम, जब शहर जाकर देखा तो गांव जन्नत से कम था कहा। जब पास हमारे टेलीफोन नहीं लगता कि जैसे […][...]

READ MOREREAD MORE

अटल विहारी वाजपेयी-रीना कुमारीअटल विहारी वाजपेयी-रीना कुमारी

  अटल विहारी वाजपेयी   भारत के प्रधान मंत्री आप थे अटल,  जिन्हें करते है हम नमण। भारत भाग्य विधाता आप थे। जो लाये देश में शांति और अमन। तेरी ख्याति फैली चहुँ ओर, गुलशन और चमन क्योंकि आप आये बहार आयी, हे अटल विहारी वाजपेयी। राजनीति में जब शुचिता की कमी आई, लोकतंत्र में जब […][...]

READ MOREREAD MORE

माँ मुझको भी पढ़ने दो ना-विजय सिंह नीलकण्ठमाँ मुझको भी पढ़ने दो ना-विजय सिंह नीलकण्ठ

माँ मुझको भी पढ़ने दो ना माँ मुझको भी पढ़ने दो ना  बहुत हो चुका काम खेत में  नौ बजता दिख रहा घड़ी में  स्कूल समय से जाने दो ना  माँ मुझको भी पढ़ने दो ना। सुबह-सुबह हीं खेत में आकर  रखा हूँ मूली उखाड़कर  गाजर का भी ढेर लगाया  अब मुझको घर जाने दो […][...]

READ MOREREAD MORE

तितली-प्रीति कुमारीतितली-प्रीति कुमारी

तितली  रंग बिरंगी आई तितली सबके मन को भाई तितली, सुन्दर-सुन्दर पंखों वाली ढेरों खुशियाँ लाई तितली । लाल पीली हरी नीली भूरी भूरी काली काली छोटी-छोटी आँखों वाली मनमोहक चमकीली तितली । दिनभर फूलों पर मंडराती फूलों के रस चूस जाती कभी थिरकती कभी मटकती, बच्चों के मन को हरसाती फर-फर करती आई तितली […][...]

READ MOREREAD MORE

परिवार-प्रकाश प्रभातपरिवार-प्रकाश प्रभात

परिवार जिसकी नीति व नज़रिया होगी खराब ! वो परिवार और दुनियाँ से होगा दुराज़ !! देखें परिवार में हुआ क्या, कल और आज, आखिर बच्चे ही तो हैं इसके साजो-साज। सभी बच्चे ही भविष्य और हैं आज , सपने हक़ीक़त जो करे है वो परवाज़। परिवार भी तो एक बहुत बड़ा धर्म है , […][...]

READ MOREREAD MORE

यह एहसास कर-नरेश कुमार निरालायह एहसास कर-नरेश कुमार निराला

यह एहसास कर माता-पिता, गुरूजनों की आशीष से जगत में सब इम्तिहान पास कर, प्रकृति परमेश्वर की है असीम कृपा ध्यान साधनाओं से यह एहसास कर। लक्ष्य निर्धारित कर आगे कदम बढ़ा संकल्प को हमेशा अपने साथ रख, श्रम है कुंजी एकमात्र मंजिल पाने की हाथ पर हाथ धर के न तू हाथ रख। बदले […][...]

READ MOREREAD MORE

अटल बिहारी वाजपेयी-नूतन कुमारीअटल बिहारी वाजपेयी-नूतन कुमारी

बिहारी वाजपेयी स्वतंत्र भारत के दसवें प्रधानमंत्री वो थे, नाम था जिनका, अटल बिहारी वाजपेयी, हिंदी कवि, पत्रकार व प्रखर वक्ता भी थे, उनकी शख्सियत से लुभायी दुनिया सारी। आजीवन अविवाहित रहने को वह थे संकल्पित, तभी तो सबने उन्हें भीष्म पितामह कहा था। कर्तव्यनिष्ठ, लगनशील, असाधारण छवि थी उनकी, 2015 में भारत रत्न से […][...]

READ MOREREAD MORE

बचपन-मधु कुमारीबचपन-मधु कुमारी

बचपन सच्चे सपनों का गुलशन प्यारा प्यारा होता है बचपन नन्हें नन्हें पंखों से भरती खुले आसमानों में ऊंची उड़ान छल कपट से दूर कोंपल मन ऐसा प्यारा होता है बचपन । बस खुशियों से भरा निश्छल मन हर ग़म से अनजान था वो बचपन आंख मिचौली, चोर सिपाही खेल खेलते नटखट हरदम कितना सुंदर, […][...]

READ MOREREAD MORE

भारतीय रेल और मेरी वाराणसी की यात्रा- मनोज कुमार दुबेभारतीय रेल और मेरी वाराणसी की यात्रा- मनोज कुमार दुबे

भारतीय रेल और मेरी वाराणसी की यात्रा ये रेल भी यार मजेदार होती है मानो तो पूरा हिंदुस्तान होती है ! एक बार बलिया से शुरू हुई मेरी यात्रा भाई साहब साथ थे इस लिए नहीं था कोई खतरा भीड़ के तंत्र से अपने मुंड कॊ घुसाये आखिर हम वहाँ पहुँच गये जहाँ थोड़ा आराम […][...]

READ MOREREAD MORE