Month: February 2021

हरदम पढना है-विजय सिंह नीलकण्ठहरदम पढना है-विजय सिंह नीलकण्ठ

हरदम पढना है हम सबको हरदम पढ़ना है कुछ ना कुछ तो ज्ञान बढ़ेगा ज्ञान कलश ऐसा हो जाए जो सागर दिन-रात बहेगा। जो भी मिले उसे पढ़ने से थोड़ा ज्ञान प्राप्त हो जाता फिर उसपर चिंतन करने से भरपूर ज्ञान तो मिल ही जाता। पढ़ने का यह मतलब न है केवल किताब को पढ़ते […][...]

READ MOREREAD MORE

बदलाव-धर्मेन्द्र कुमार ठाकुरबदलाव-धर्मेन्द्र कुमार ठाकुर

बदलाव हुआ यूँ, समय बदल गया, बचपन बदला, युवा पीढ़ी बदल गया। रहन-सहन बदला, खान-पान बदल गया। रंग बदला, ढंग बदला चाल-ढ़ाल बदल गया। मानव बदला, उसमें मानवता बदल गयी। शिक्षा तो आयी, संस्कार कहीं खो गया। व्यवहार, व्यहविचार में बदल गया। हर क्षण लोगों की मनोवृत्ति बदलती रही । प्रकृति ने अपने में बदलाब […][...]

READ MOREREAD MORE

स्कूल चलें हम-विकासस्कूल चलें हम-विकास

स्कूल चलें हम उठाओ झोला उठाओ बस्ता शिक्षा पाना हुआ बहुत ही सस्ता वायरस ने किया था घर में बन्द बच्चों की पढ़ाई हुई थी मंद वैज्ञानिकों ने कमाल कर दिया कोरोना का टीका जल्द बना दिया सभी लोग टीका लगवा रहें हैं थम चुकी जीवन को आगे बढ़ा रहें हैं बच्चे होते देश के […][...]

READ MOREREAD MORE

अनुराग समर्पित-दिलीप कुमार गुप्तअनुराग समर्पित-दिलीप कुमार गुप्त

अनुराग समर्पित  धवल अन्तःकरण हो जागृत उपहास किंचित न हो प्रस्फुटित मिथ्या आचार सदा विसर्जित मन कर्म वाणी हो सदा सुसज्जित।  उर मैत्री भाव हो स्पंदित अश्रु प्रेम नैनन हो निःसृत नर में नारायण हों दर्शित नारी में मातृ भाव हो पुलकित।  लौकिक ज्ञान से हों परिपूरित आध्यात्मिकता पावन पुनीत आस्था संग मन मंदिर सुगंधित […][...]

READ MOREREAD MORE

फिर से विद्यालय में-भोला प्रसाद शर्मा फिर से विद्यालय में-भोला प्रसाद शर्मा 

फिर से विद्यालय में अरे! चल-चल-चल-चल मेरे भाई, करली खूब मस्ती अब करले तू पढ़ाई।  फिर से अब खुल जाऐंगे विद्यालय हमारे, आयेंगे रोज हम बच्चे भी सब प्यारे। पापा के प्यारी जी मम्मी के सलौने, उठा अब तू बस्ता छोड़ दे खिलौने।  छोटी-छोटी गुड़िया भी स्कूल अब आएंगे , झूम-झूमकर गायेंगे और खुशियाँ भी […][...]

READ MOREREAD MORE

अभिलाषा-देव कांत मिश्र ‘दिव्य’अभिलाषा-देव कांत मिश्र ‘दिव्य’

अभिलाषा मेरी यह तो अभिलाषा है उर को पावन नित बनाऊँ। जन-जन शिक्षा अलख जगाकर मन को सुघड़ कार्य लगाऊँ।। मेरी यह ——————-। भाग्य से मानुष तन मिला है। दिल से इसे स्वस्थ रचाऊँ। भाव उपकार तरु जैसा ही कर जीवन में पग बढ़ाऊँ।। मेरी यह—————-। मात-पिता की नित सेवा कर निज कर्म का गुण […][...]

READ MOREREAD MORE

प्रकृति का श्रृंगार बसंत-भवानंद सिंहप्रकृति का श्रृंगार बसंत-भवानंद सिंह

प्रकृति का श्रृंगार बसंत  बह रही है वासंती बयार भिनी-भिनी खुशबू बिखेरती, चले पवन हर डार-डार हिय से करूँ इसका आभार। नव पल्लव लग जाते हैं वृक्ष और लताओं में, अन्त:करण खिल उठता है ऋतुराज बसंत के आने से। बसंत ऋतु जब आता है प्रकृति का श्रृंगार बढ जाता है, वन्यजीव और पशु पक्षियों में […][...]

READ MOREREAD MORE

वर्षा रानी-अवनीश कुमारवर्षा रानी-अवनीश कुमार

वर्षा रानी वर्षा रानी आओ ना धरा की प्यास बुझाओ ना तपती धरती तुझे बुलाती इनको तृप्त कर जाओ ना सुखी नदियाँ तुझे बुलाती इनको तू भर जाओ ना जन जन है पानी बिन व्याकुल होते इनकी प्यास बुझाओ ना सूखे वृक्ष तुझे बुलाते हरियाली फैलाओ ना बच्चे बच्चे तुझे बुलाते अब बिजली चमकाओ ना […][...]

READ MOREREAD MORE

प्रार्थना में शक्ति है-अनुज वर्माप्रार्थना में शक्ति है-अनुज वर्मा

प्रार्थना में शक्ति है सबसे सुंदर भक्ति है प्रार्थना सबसे सार्थक युक्ति है प्रार्थना भक्त की शक्ति है प्रार्थना कर्णप्रिय श्रुति है  प्रार्थना ।१। ईश्वर प्राप्ति की पहल है प्रार्थना भक्त की भक्ति में विश्वास है प्रार्थना मानव में दया का भाव है प्रार्थना शांति का सहज प्रयास है प्रार्थना ।२। अपने में चेतना का […][...]

READ MOREREAD MORE

गुरु वंदना-अशोक कुमारगुरु वंदना-अशोक कुमार

गुरु वंदना हम करते हैं तेरा गुणगान प्रभु, मेरे सिर पर रखना करुणा का हाथ प्रभु। सर्वदा रखना दीन दुखियों पर दया प्रभु, उनका जीवन में आए हर्ष उल्लास प्रभु।। ‌ जन-जन में भर दे समता का ज्ञान प्रभु, जीवन हो निर्मल एवं नेकी का प्रतीक प्रभु। क्रोध, मद, मोह, लोभ का करना अंत प्रभु, […][...]

READ MOREREAD MORE