Month: March 2021

कलम की ताक़त-अशोक प्रियदर्शी कलम की ताक़त-अशोक प्रियदर्शी 

कलम की ताक़त कलम एक तेज हथियार है,  इसका प्रयोग संभलकर करना है। जो समझे इसकी महत्ता को,  वरना जीते जी मरना है । कलम में गुणकारी संस्कार है,  प्रायः करती लोगों के उपकार है। किसी भी अनहोनी घटना में,  सहना तो पड़ता तिरस्कार है।  कलम से ऋषि मुनियों ने,  अनेकों ग्रंथ लिखे यह प्रमाण […][...]

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वह शिक्षक हैं-गिरिधर कुमारवह शिक्षक हैं-गिरिधर कुमार

 वह शिक्षक हैं बच्चे, स्कूल कक्षा, कोलाहल अपेक्षाएं अपरिमित सीमाएं और वह शांत है, सजग है, सुदृढ़ है वह शिक्षक है।  प्रशंसा की विचलन से अनजान वह आश्वस्त है अपनी दीनता के मायने से हर एक अपेक्षाओं की पड़ताल करता अपनी कमियों को विचारता, गुनता वह सतत रत है अपनी सार्थकता के तईं वह शाश्वत […][...]

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कलम या तलवार-चॉंदनी झाकलम या तलवार-चॉंदनी झा

कलम या तलवार है तेज तलवार से, कलम की धार, आओ करें इस पर विचार। बोलती है कलमें, सब कुछ लिखती है कलमें।  जीवन लिखती, मृत्यु लिखती, सच झूठ में फर्क बताती है कलमें। कवि, लेखक, शायर बनाती, जीवन का अंधकार मिटाती है कलमें। है कलम की ताकत जिसके पास, न होता कभी वह बेबस […][...]

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ऋतुराज की आली-डॉ. अनुपमा श्रीवास्तवाऋतुराज की आली-डॉ. अनुपमा श्रीवास्तवा

ऋतुराज की आली अमुआ की डाली पर बैठी मैना से यह कोयल बोली, सात रंग आँखों में लेकर लो आ गई ऋतुराज की आली। देख उसे ले पवन हिलोरे “कानन” में मडराते भँवरे,  कलियों संग वह करे ठिठोली लो आ गई ऋतुराज की आली। धानी चुनर “वसुधा” को भाई कली-कुसुम ने ली अंगराई, जैसे हो […][...]

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छोटे से जीवन में हर पल-अर्चना गुप्ताछोटे से जीवन में हर पल-अर्चना गुप्ता

छोटे से जीवन में हर पल  छोटे से ही जीवन में हर पल  फूल विहँसते रहते हैं। सजाए रखो मुस्कान लबों पर हर पल हमसे कहते हैं।  क्षणभंगुर सी है जीवन नैया  सुख-दुख संग ही चलते हैं। छोटी छोटी खुशियाँ ही तो  सदा जीवन में रंग भरते हैं। खुलकर जी ले तू हर पल को […][...]

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भारतरत्न बिहार की माटी के गौरव-अपराजिता कुमारीभारतरत्न बिहार की माटी के गौरव-अपराजिता कुमारी

भारतरत्न बिहार की माटी के गौरव भारत के प्रथम राष्ट्रपति भारतरत्न महान बिहार की माटी के गौरव स्वतंत्रता सेनानी देशरत्न बिहार की माटी के शान।  बिहार के गौरव ने जन्म लिया 3 दिसंबर 1884 को बिहार में सिवान के छोटे से गांव जीरादेई में पिता महादेव सहाय मां कमलेश्वरी देवी के घर परिवार था इनका […][...]

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जीवन में न मिलेगी मात-विकासजीवन में न मिलेगी मात-विकास

जीवन में न मिलेगी मात गोल गोल होते आलू शहद प्रेमी होता भालू टमाटर होती लाल लाल तोते की चोंच भी देखो लाल प्याज बहुत ही सबको रुलाती काली कोयल मीठी गीत सुनाती मटर के दाने गोल गोल हमेशा सत्य वचन ही बोल मिर्च बहुत ही तीखे होते आलसियों के भाग्य सदा ही सोते दुनिया […][...]

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होली-विजय सिंह नीलकण्ठहोली-विजय सिंह नीलकण्ठ

होली रंगों की बौछार लेकर देखो आई है होली साथ अबीर का थाल लेकर देखो आई है होली। साथ में मिलकर निकल चुके हैं देखो बच्चों की टोली हर कर में पिचकारी दिखती दिखता जेब अबीर झोली। पिंपल डिंपल सिंपल सबके चेहरे दिखते खिले खिले कटुता को भुलाकर सखियॉं एक दूजे के गले मिले। दही […][...]

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मेरा बिहार-विजय सिंह नीलकण्ठमेरा बिहार-विजय सिंह नीलकण्ठ

मेरा बिहार मेरा बिहार प्यारा बिहार न दूजा इस जैसा संसार यहाँ मिले भरपूर प्यार एक बार नहीं हजारों बार।  अड़तीस जिले हैं इसकी सान जिससे है इसकी पहचान हम सबका है मान सम्मान स्वच्छता हो इसकी पहचान।  मिट्टी इसकी है उपजाऊ जिसपर उपजे अन्न सा सोना सबको भर पेट भोजन मिलता न पड़ता है […][...]

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वैभवशाली बिहार-लवली वर्मावैभवशाली बिहार-लवली वर्मा

वैभवशाली बिहार 22 मार्च 1912 को पृथक होकर, पाया बिहार ने अपना अस्तित्व। 109 वर्षों की गौरवशाली यात्रा, अतीत हज़ार वर्षों से रहा समृद्ध। समृद्ध संस्कृति, जीवंत परंपरा, भूमि अत्यंत है वैभवशाली। विद्वानों-दार्शनिकों की जन्मभूमि, बना इसका इतिहास गौरवशाली। ऐतिहासिक हो या फिर धार्मिक, सांस्कृतिक में भी विशिष्ट पहचान अछूता नहीं इसका कोई पहलू, हर […][...]

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