Month: April 2021

मॉं-प्रियंका कुमारीमॉं-प्रियंका कुमारी

मॉं छोटे-छोटे कदमों से चलना तू हमें सिखलाती, खुद पीछे रहकर, आगे हमें बढ़ाती, जब मैं छोटी थी तब तू बिस्तर पर अकेली छोड़ जाती, तुझे आसपास न देखकर, मैं जोर जोर से चिल्लाती, सुन आवाज तू दौड़ी मेरे पास चली आती, आकर मुझे जोर से सीने से लगाती। फिर धीरे-धीरे इधर-उधर की बातें कहकर […][...]

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कोरोना का कहर-रीना कुमारीकोरोना का कहर-रीना कुमारी

कोरोना का कहर देखो फिर से है संक्रमण बढ़ रहा, सभी कोरोना के कहर से है डर रहा। बच्चों के साथ बड़े भी सावधान हो रहे, अपना अमूल्य जीवन बचाने का हल ढूंढ रहे, जीवन थम गया, लगता है जैसे नीरसता की ओर जा रहा, देखो फिर भी सतर्क रहो क्योंकि संक्रमण बढ़ रहा। अमूल्य […][...]

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हर जंग जीते हैं जीतेंगे इसे-संजीव प्रियदर्शीहर जंग जीते हैं जीतेंगे इसे-संजीव प्रियदर्शी

हर जंग जीते हैं जीतेंगे इसे वक्त के मिजाज को यूं भांप रखो घर से बाहर‌ चेहरा ढांक रखो। अभी साथ-साथ रहना ठीक नहीं हर वक्त दो गज दूरी माप रखो। जब भी बाहर से तुम आओ सदन जूते उतार, पांव-कर मांज रखो। यह जिन्दगी इक नेमत है, जानो ताउम्र जीने की ललक पाल रखो। […][...]

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नूतन वर्ष की बधाई-निधि चौधरीनूतन वर्ष की बधाई-निधि चौधरी

नूतन वर्ष की बधाई देखो फसलें लहलहा रहें, पेड़ भी हैं फलों से लदें, ये कैसी मंगल बेला आई, नूतन वर्ष की नूतन बधाई। पावन पावन पवन चले, फूलों की भी सुगंध बहे, मौसम ने भी ली अंगड़ाई, नूतन वर्ष की नूतन बधाई। बदला ऋतु, बदली सारी फिजाएं, बही खाते भी सब ने बदलवाए। कोयल […][...]

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जीवन के आयाम-प्रीति कुमारीजीवन के आयाम-प्रीति कुमारी

जीवन के आयाम सुबह हुई अब आँखें खोलो, बिस्तर छोड़ो, मुहँ हाथ धोलो। नित्य क्रिया से निबट जाओ तुम, पढाई-लिखाई में मन लगाओ तुम। थोड़ा सा योगा, थोड़ा सा ध्यान, थोड़ा उछल-कूद,थोड़ा व्यायाम। सुबह नाश्ता करो भरपूर, ताजे फल और खाओ खजूर। दोपहर में तुम पीयो छाछ, शरबत लस्सी दूध बादाम। तरोताजा रहोगे हरदम, स्वस्थ […][...]

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पेड़ लगाएं-नूतन कुमारीपेड़ लगाएं-नूतन कुमारी

पेड़ लगाएं आओ मिलकर पेड़ लगाएं बीमारी को दूर भगाएँ, नित दिन करें हम इसका भान, तभी है संभव जगत कल्याण। अगर पेड़ तुम काटोगे तो आक्सीजन कहाँ से पाओगे, जन मानस की पीड़ा को तुम और अधिक बढ़ाओगे। वृक्ष लगाना परोपकार है मानवता से यही प्यार है, पेड़ से पाएंगे हम औषधि न कोई […][...]

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नन्हीं गौरैया-नरेश कुमार “निराला”नन्हीं गौरैया-नरेश कुमार “निराला”

नन्हीं गौरैया भूरे रंग की कुछ गौरैया हमारे घर में रहती है, सुबह-सवेरे उठकर वो चीं-चीं चूँ-चूँ करती है। उसकी मधुर आवाज सुन बिस्तर छोड़ उठ जाता हूँ, फुदक रही नन्हीं गौरैया को अपने घर-आँगन में पाता हूँ। ज़मीं पर बिखरे दाने को वो चुग-चुग कर खाती है, जब भी कोई निकट पहुंचे पंख फैला […][...]

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तिरंगा-मनु कुमारीतिरंगा-मनु कुमारी

तिरंगा तीन रंगों का अपना झंडा नाम है इसका प्यारा “तिरंगा” तीन रंगों का है गुण विशेष इन गुणों को धरें हम रखें न द्वेष। केशरिया बल भरने वाला, दुश्मनों के दांत जो खट्टे कर दे साहस, शौर्य का प्रतीक है “तिरंगा”। सादा रंग है सच्चाई का प्राण भले चले जायेंगे लेकिन झूठ का दामन […][...]

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खुशी-सुरेश कुमार गौरवखुशी-सुरेश कुमार गौरव

खुशी खुशी, आज-कल कहां टिकी रहती हो? इस भाग-दौर में ज्यादा नहीं मिलती हो!! लगता है अब भाव भी अधिक खाती हो! न जाने आकर फिर कहां चली जाती हो!! पहले “खुशी” तो आसपास ही थी अब तो! खुशियां बांटने हरदम भी नहीं आती हो!! बचपन और यौवन काल में तो थी खुशी! लगता अब […][...]

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