बारहमासा-कुमकुम कुमारी ‘काव्याकृति’-पद्यपंकज

बारहमासा-कुमकुम कुमारी ‘काव्याकृति’

बारहमासा

बारह माह और छः ऋतुओं से वर्ष का होता है निर्माण।
आओ हम अपने शब्दों में करते हैं इसका बखान।

नव संवत्सर का प्रथम मास है आया
चैत्र मास देखो जीवन में नवचेतना लाया।

अब आया दूसरा महीना वैशाख बहुत है खास
स्कूलों में छुट्टी हुई बच्चों में है उल्लास।

जेठ की भरी दुपहरियों में घर में सब हैं बंद
तरह तरह के आइसक्रीमो का हम लेते हैं आनंद।

अरे काले-काले बादल आकाश में मंडराया
लगता है आषाढ़ का महीना है आया।

रिमझिम-रिमझिम बूंदों से हरियाली है हर ओर
सावन के आगमन से नाचे मन का मोर।

भादो के महीने में बारिश ने ली अंगड़ाई
नदियों और तलाबों में पानी ने मचाया तबाही।

आया प्यारा माह अश्विन का मौसम हुआ सुहाना
न गर्मी न सर्दी है मौसम हुआ मस्ताना।

पावन महीना कार्तिक का लाया नया उल्लास
घर-घर में दीप जले खुशियाँ चूमे आकाश।

ठिठुरती सर्दी के साथ अगहन का हुआ आगाज
दिन होने लगा छोटा रात हुई विराट।

आया मास पौष का सर्दी से तंग है हाल
फिर भी हाथ पतंगे ले दौड़े देखो लाल।

माघ महीने की तो यारों मत पूछो तुम हाल
ऋतुराज के आगमन से मौसम हुआ खुशहाल।

हिन्दू पंचांग का अंतिम माह फागुन है आया
अपने साथ देखो रंगों का त्यौहार है लाया।

कुमकुम कुमारी ‘काव्याकृति’
शिक्षिका
मध्य विद्यालय बाँक, जमालपुर

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