जब जब मुसीबतें धरा पर आईं
कृष्ण तुम्हारी सुधि हमें आई
आज संकट है इस धरा पर आया
नफरतों का घना कोहरा हर मन पर छाया।
मुरलीधर तुम आओ
प्रेम का पाठ तुम जगत को एक बार पढ़ाओ।
एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ है,
दूसरे को गिरा बढ़ते रहने की दौड़ है
स्वार्थपरता हो रही है हर तरफ हावी,
सहयोग नही कही दिख रहा प्रभावी
गिरधरनागर तुम आओ
मित्रता का पाठ तुम फिर सबको ही पढ़ाओ।
हिंसा का बढ़ रहा प्रकोप है,
मूक जानवरों पर चलता सब जोर है,
पशुओं की सेवा और सुरक्षा का इंतजाम नही
बस मतलब पर फिक्र का जोश है
बाँके बिहारी तुम आओ
गौ प्रेम और गौ सेवा का मंत्र जनमानस में भर जाओ
चंचलता और मासूमियत खो रही,
मुश्किल में देखो बचपन भी अब हो रही,
अब कहाँ दिखती है सरलता बचपन की
तकनीकी युग है और दिखावटें कैसे ढो रही,
नन्दलाला तुम आओ
बचपन की मासूमियत और सरलता को बचाओ
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रूचिका


