मुट्ठी में रेत… मनु कुमारी

मुट्ठी में रेत-सी है यह जीवन की कहानी,कब फिसल जाए उँगलियों से, किसे है यह निशानी।काग़ज़-सा भीग जाए, जल में घुल जाए पल में,बूँदों का बुलबुला-सा, टूटे क्षण भर के…

होली गाए रे- रामकिशोर पाठक

होली गाए रे मचल-मचल के भ्रमर कुमुदिनी में छुप जाए रे। आज पपीहा कूक मधुर सी होली गाए रे।। कलियाँ हंँसकर इठलाई खोल पंखुरियाँ रे। लगी तितलियाँ मँडराने गलियाँ-गलियाँ रे।।…

ग़जल-रामपाल प्रसाद

ग़ज़ल दूर कितना मगर चलेंगे हम। दिख रहा है शहर चलेंगे हम।। शीत अब छोड़ है गया मग को। दिख रही है डगर चलेंगे हम।। मान्यताऍं नहीं सरल फिर भी।…

प्रेम- रामकिशोर पाठक

प्रेम – सरसी छंद गीत प्रेमिल रहना चाहत सबकी, उलझन में संसार। करते सब हैं प्रेम जगत में, सबके अलग प्रकार।। कोई धन से नाता जोड़े, देता है जी जान।…

बच्चो तुम प्रश्न पूछो – गिरींद्र मोहन झा

बच्चों तुम प्रश्न पूछना ! बच्चों तुम प्रश्न पूछना शिक्षकों से, गुरुजनों से, माता-पिता से, गूगल से, अपने वरेण्य जनों से, तुम्हारे प्रश्नों से ही तुम्हारा स्तर समझा जाता है,…

मंगल रामपाल प्रसाद सिंह

मनहर घनाक्षरी। मंगल नीले-नीले नभ नीचे,हरियाली नैन खींचे, मटर की छिमियों में,स्वाद बलवान है। सर्षप के आसपास,अलसी बसी है खास, नीली-नीली ऑंखवाली,तारे के समान हैं। बौने-बौने मसूरी में,लाल लहू दाने…

तुम हो तो बसंत है-मनु कुमारी

तुम हो तो बसंत है, वरना मौसम रूठ जाते हैं, तुम्हारी हँसी से पतझर भी गीत गुनगुनाते हैं। तुम्हारा साथ मिले तो राहें मुस्कुराती हैं, अधूरी-सी ज़िंदगी भी पूरी हो…