Punam Kumari

मैं एक बिखरी दास्तान हूँ-पुनम कुमारीमैं एक बिखरी दास्तान हूँ-पुनम कुमारी

0 Comments 8:04 pm

  मैं एक बिखरी दास्तान हूँ, कुछ अधूरे ख़्वाबों का नाम हूँ। कभी हँसी में छुपा दर्द हूँ, कभी ख़ामोशी[...]

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Dharmendra Kumar Thakur

मूक वेदना और स्वर्ण मंडी-धर्मेंद्र कुमार ठाकुर मूक वेदना और स्वर्ण मंडी-धर्मेंद्र कुमार ठाकुर 

0 Comments 7:56 pm

मूक वेदना और स्वर्ण मंडी-धर्मेंद्र कुमार ठाकुर  मौन खड़ी प्रकृति रोती है, अंबर से झरते आँसू, पवित्र लगन की वेदी[...]

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Punam Kumari

बच्चों तुम फूल मेरे, बागवान के — पुनम कुमारीबच्चों तुम फूल मेरे, बागवान के — पुनम कुमारी

0 Comments 7:03 pm

बच्चों तुम फूल मेरे, बागवान के — पुनम कुमारी बच्चों, तुम फूल मेरे, विद्यालय बागवा, तुमसे ही महके सदा, मेरा[...]

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Dharmendra Kumar Thakur

भूख की हुंकार – धर्मेंद्र कुमार ठाकुरभूख की हुंकार – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर

0 Comments 11:34 pm

भूख की हुंकार भूख उदर में जब आती है, रणचंडी-सा रूप दिखाती है, धमनियों में लहू उबलता है, नस-नस में[...]

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Dharmendra Kumar Thakur

कर्त्तव्य बोध – धर्मेंद्र कुमार ठाकुरकर्त्तव्य बोध – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर

0 Comments 9:10 pm

कर्त्तव्य बोध अधिकार जताने से पहले कर्त्तव्य हमें समझाना होगा, अमृत रस पाने से पहले विष का प्याला पीना होगा।[...]

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Dharmendra Kumar Thakur

शब्द-बाण और ब्रह्मांड का कम्पन- धर्मेंद्र कुमार ठाकुरशब्द-बाण और ब्रह्मांड का कम्पन- धर्मेंद्र कुमार ठाकुर

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शब्द-बाण और ब्रह्मांड का कम्पन वाणी वह अनमोल रतन है, जो चाहे तो सृष्टि संवार दे, पर ज़रा सी चूक[...]

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निपुण बिहार — एक संकल्प-अक्षय श्रीवास्तवनिपुण बिहार — एक संकल्प-अक्षय श्रीवास्तव

0 Comments 8:54 pm

निपुण बिहार — एक संकल्प चलो आज फिर एक दीप जलाएँ, हर बच्चे को आगे बढ़ाएँ। जिसके हाथ में कलम[...]

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पहुंच मंजिल अब मुस्काना है -अर्चना गुप्तापहुंच मंजिल अब मुस्काना है -अर्चना गुप्ता

0 Comments 8:36 pm

पहुंच मंजिल अब मुस्काना है पथ की बाधाओं से डरकर दुख की झंझाओं से थककर हे पथिक ! तुम हार[...]

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Dharmendra Kumar Thakur

महामंत्र: आत्म शुद्धि- धर्मेंद्र कुमार ठाकुरमहामंत्र: आत्म शुद्धि- धर्मेंद्र कुमार ठाकुर

0 Comments 8:30 pm

महामंत्र: आत्म शुद्धि सिद्ध होंगे कार्य सारे, सिद्धियाँ चरण चूमेंगी, सफलता की पताकाएँ, गगन में गोल घूमेंगी। अगर पहचान ले[...]

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जिंदगी क्या है?_ गिरीन्द्र मोहन झाजिंदगी क्या है?_ गिरीन्द्र मोहन झा

0 Comments 8:01 pm

जिंदगी क्या है? ईश्वर में आस्था रखते हुए स्थितप्रज्ञ और आत्मभाव में स्थित होकर निरंतर कर्म करने का नाम है[...]

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