बस यूं ही-विजय शंकर ठाकुरबस यूं ही-विजय शंकर ठाकुर

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गाय -बैलों को भूलकर, कुत्ते के पीछे भागते, गंवार से संभ्रांत बनने की चाहत में। भूलते बिसरते अतीत ! खुले[...]

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ज्ञान का दीपक शिक्षक – कार्तिक कुमारज्ञान का दीपक शिक्षक – कार्तिक कुमार

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ज्ञान का दीप जलाता शिक्षक, फिर भी दुख ही पाता शिक्षक। बच्चों को उजियारा देता, अपने मन को समझाता शिक्षक।[...]

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शिक्षा का मंदिर – कार्तिक कुमारशिक्षा का मंदिर – कार्तिक कुमार

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शिक्षा का मंदिर न्यारा है, ज्ञान जहाँ का उजियारा है। यहाँ संस्कारों की गंगा बहती, जीवन की हर राह सँवरती।[...]

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राष्ट्रवाद-मृणाल गौतमराष्ट्रवाद-मृणाल गौतम

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तुम अलख जगाओ ‘राष्ट्रवाद’ की न्याय नीति की—‘नव प्रभात’ की नवचेतना जाग्रति होगीं— जन-मानस हुँकार भरेगा, भारत नव निर्माण के[...]

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