जन्म देकर कह रही माँ,पूज लो भगवान को। लग गया आघात पल में,आज तो “अनजान”को।। कर लिया ऐसा अगर मैं,छोड़कर[...]
कविता और कवि – राम किशोर पाठक कविता और कवि – राम किशोर पाठक
मैं वही शब्द का शिल्पकार हूँ। काव्य में भाव का चित्रकार हूँ।। छंद कविता बनी खास संगिनी। हर रही चित[...]
संबंध – राम किशोर पाठक संबंध – राम किशोर पाठक
सुंदर सा संबंध, जहाँ बन जाए। जीवन का सुख सार, वही हम पाए।। हर रिश्तों के संग, रहे समरसता। सुरभित[...]
प्यारी लीची-कार्तिक कुमारप्यारी लीची-कार्तिक कुमार
तू है मीठी, रस से भरी, प्यारी-प्यारी लीची, गर्मी में ठंडक पहुँचाती, सबको लगती अच्छी। हरे पत्तों के बीच चमकती,[...]
मां-ब्यूटी कुमारीमां-ब्यूटी कुमारी
ममता की निर्मल सरिता, वसुंधरा सी असह्य पीड़ा, सह कहलाती जननी । स्वयं भूखी परवाह नहीं, बच्चों के क्षुधा मिटाने[...]
माँ की ममता-राम किशोर पाठक माँ की ममता-राम किशोर पाठक
जग में लानेवाली माँ की, ममता का है मोल नहीं। कैसे चर्चा मैं कर पाऊँ, निकल रही है बोल नहीं।।[...]
मां-बिंदु अग्रवालमां-बिंदु अग्रवाल
मैंने उसे कभी चैन से सोते नहीं देखा। मजबूरी का रोना कभी रोते नहीं देखा।। हर वक्त थामे रहती थी[...]
माँ-रूचिकामाँ-रूचिका
अधूरी हसरतों के संग अधूरी सी लगती जिंदगी, खुशियों की बातें लगती सब बिल्कुल ही बेमानी, तेरा साथ मेरे टूटते[...]
वंदन करिए सुभग अवधेश को रामकिशोर पाठकवंदन करिए सुभग अवधेश को रामकिशोर पाठक
वंदन करिए सुभग अवधेश को- विजया/मनोरमा छंद गीत वंदन करिए सुभग अवधेश को। संग विराजे सुता मिथिलेश को।। भव-भंजन सुख-दायक[...]
मेरी मां – आशीष अम्बरमेरी मां – आशीष अम्बर
शीर्षक :- मेरी माँ माँ शब्द एक और अर्थ है अनेक, यह कैसे कर दिखलाती हो । इस एक शब्द[...]
