विधा – कविता उड़ीं वासंती खुशबू । पीत वसन ओढ़े धरा, अंबर दिखता लाल , टेसू सरसों खिल गए , मौसम बदले चाल । तन चढ़ता आनंद है, मन वासंती…
होली आई -ब्यूटी कुमारी
होली आई होली आई होली आई, खुशियों की सौगात लाई। रंगों की बौछार लाई, सबको हमने गुलाल लगाई। पूआ और मिठाई खाई, होली आई होली आई, खुशियों की सौगात लाई।…
कुत्ते पाल रहे-नीतू रानी
लोग माता -पिता को अपने घर में दुत्कार रहे , खरीद कर लाए शौक से कुत्ते पाल रहे। माता- पिता को समय पर नही देते खाना, कुत्ते को अच्छा खाना…
होली का रंग-कार्तिक कुमार
बच्चों, बुद्ध, महिला, पुरुष, युवती-युवक सब मिलें भरपूर। होली का रंग सबको भाए, प्रेम का संदेश जग में फैलाए। नन्हे बच्चे हँसते-गाते, पिचकारी से रंग बरसाते। युवक-युवती झूम-झूम गाएँ, मित्रों…
बसंत का आगमन -जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’
खेतों में हरियाली शोभें सरसों-अलसी बलखाती है। ऋतुराज के स्वागत में कोयल गीत खुशी से गाती है। नव पल्लव पा मधुबन हंँसता कलियांँ खिलती हैं धीरे, हरे दूब पर बिछें…
फाग में महका है हर अंग– राम किशोर पाठक
खिली जो कलियाँ ले नव रंग। फाग में महका है हर अंग।। देख कर फूलों का शृंगार। भ्रमर ने छेड़ा कोई तार।। प्रीत है गाता उसका गान। सुनी तो कलियाँ…
तुम चलो तो सही-अमृता कुमारी
सारी नाउम्मीदी, उलझनों, चिंताओं को किनारे रखकर, एक बार उठो तो सही! पता है कि रास्ते में आती हैं मुश्किलें हजार कोई बात नहीं; घबराना, रुकना या…
देखो आयी होली – आयी होली- श्री रवि कुमार
रंगों से हुई आँख मिचोली, देखो आयी होली-आयी होली । बच्चों बूढ़ो की निकली टोली, देखो आयी होली-आयी होली ।। प्यार भरा ये त्योहार, बना देता आपसी व्यवहार। मिलती सबसे…
फाग-राम किशोर पाठक
हुआ है धूमिल सभी उमंग। फाग में कैसे खेलें रंग।। लगे हैं रोटी में श्रीमान। सदा हैं वे भी तो हलकान।। याद उनको भी आती रोज। रहे नित अवसर को…
फाग क्या होती अम्मा बोल-राम किशोर पाठक
बजाते हैं सब देखो ढोल। फाग क्या होती अम्मा बोल।। सभी जो करते हैं हुड़दंग। तभी तो जो जाता हूँ तंग।। सभी के ऐसे होते ढंग। देखकर आता हमें उमंग।।…