क्रोध की सीमा न होती है, जब यह उमड़ आती है, इसकी ज्वाला धधक-धधक कर, विवेक मानव खा जाती है।[...]
हम प्रकृति के पेड़ बेचारे – उमेश कुमार सिन्हा ‘निर्देशक ‘हम प्रकृति के पेड़ बेचारे – उमेश कुमार सिन्हा ‘निर्देशक ‘
प्रकृति के पेड़-पौधे हम बेचारे, हम मानव के बहुत काम आए, आएँगे। पर मुझे यह अरमान नहीं कि मानव से[...]
उड़ान-धर्मेंद्र कुमार ठाकुरउड़ान-धर्मेंद्र कुमार ठाकुर
पंख नहीं हैं मेरे अपने, पर देखा है ढेरों सपने। शून्य खड़ा हूँ भूमि पर मैं, पर छूना है नील[...]
मैं अपनी पहचान बना लूं- पूनम कुमारीमैं अपनी पहचान बना लूं- पूनम कुमारी
मैं अपनी पहचान बना लूं गुमनाम होने से पहले, जी करता है , गांव के मैले आंचल में छुप जाऊं[...]
प्रकृति प्रहरी-पूनम कुमारीप्रकृति प्रहरी-पूनम कुमारी
जब धरती की साँसें घुटती हैं, जब नदियाँ रोती हैं, जब जंगल की हरियाली धीरे-धीरे खोती है, तब कौन बनेगा[...]
देश का भविष्य: नन्हें मुन्ने-धर्मेंद्र कुमार ठाकुरदेश का भविष्य: नन्हें मुन्ने-धर्मेंद्र कुमार ठाकुर
ये बात है उन नन्हें मन्नों की, मासूम सी भोली आँखों की। खेल ही जिनकी दुनिया है, ना फिक्र इन्हें[...]
आत्मा की अमरता-कुमारी प्रियंका वर्माआत्मा की अमरता-कुमारी प्रियंका वर्मा
अपने धुन में ही लगे हैं सब किसी को किसी की सोच नहीं समझ सको समझो ,ये जिंदगी बोझ नहीं[...]
दुनियां रंग-बिरंगी – धर्मेंद्र कुमार ठाकुरदुनियां रंग-बिरंगी – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर
दुनियां रंग-बिरंगी – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर अजब तमाशा, गजब ये मेला, दुनियां रंग-बिरंगी है, कहीं मखमली चादर ओढ़े, कहीं भयानक[...]
मातृनवमी मायक स्मृति – अरविन्द मिश्रमातृनवमी मायक स्मृति – अरविन्द मिश्र
मातृनवमी मायक स्मृति – अरविन्द मिश्र रे मीता मोन परै अछि माय, कोन कठिन ब्रत तपकें ठानल, देव पितर ककरा[...]
खो रही है अस्मिता को – रामपाल प्रसादसिंह अनजानखो रही है अस्मिता को – रामपाल प्रसादसिंह अनजान
खो रही है अस्मिता को – रामपाल प्रसादसिंह अनजान है गिरी दीवार भारी, टूटता आधार से। रो रही सीता हमारी,[...]
