भोलेनाथ हो-राम किशोर पाठक

लेकर आए हैं बाराती, करके चौड़ी छाती, भोले नाथ हो। है हैरत में दुनिया सारी, अद्भुत रूप निहारी, शशिधर माथ हो।। भूत-प्रेत सब नाच रहे हैं, सुरगण सजकर धाए। हाथी…

शिव विवाह -रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’

क्षितिज लालिमा की झलक,संपूरित उल्लास। नभचर थलचर चेतना,भरतीं हैं हुल्लास।। सारी सृष्टि सजी-धजी,निकलेगी बारात। गाजे-बाजे में खिले,दानव-मानव जात।। जय-जय हे शिव-पार्वती,मिटें दिलों की स्याह। उन्मत उत्सव दिव्यता,दिखा रही शुभ राह।।…

*गुरु-शिष्य महिमा*

गुरु-शिष्य महिमा   गुरु चाणक्य का सानिध्य पाकर, चंद्रगुप्त मिशाल बना; नंद वंश का नाश कर, वह मगध सम्राट बना।   भद्रबाहु से शिक्षा पाकर, प्रियदर्शी अशोक बना; विश्वभर में…

मेरे सपनों का गांव

कविता   मेरे सपनों का गाँव   सहज सुभग शाश्वत विहान हो। मधु खग-कलरव, दिव्य आख्यान हो। जन-जन में बसे प्रबुद्ध ज्ञान हो। हो प्राकट्य जब प्रथम किरण का, विकास…