होली-कहमुकरी- राम किशोर पाठक

उसके आते नर्तन करती। मन में नव भावों को गढ़ती।। बहकाए वह मेरी बोली। क्या सखि? साजन! न सखी! होली।।०१।। आते ही उल्लास जगाए। उपवन सरिस बदन महकाए।। करके हर-पल…

महिला सशक्तिकरण-राम किशोर पाठक

नारी के सम्मान की, आज लगी है होड़। पुरुष बिचारा कर रहा, घर-बाहर कर-जोड़।। घर-बाहर कर-जोड़, करे दिल को समझाए। आधा निज का अंग, उसे सामर्थ्य दिखाए।। खुशी आज चहुँओर,…

नारी- राम किशोर पाठक

नारी का सम्मान, हमें संस्कृति सिखलाती। जीवन की हर राह, हमें नारी ही दिखलाती।। देती जब यह जन्म, दुग्ध से पालन करती। हर-पल भरती नेह, अंक में लालन करती।। ममता…

श्याम नारी वेश में-राम किशोर पाठक

श्याम नारी वेश में। पुष्प डाले केश में।। माथ पर डलिया लिए। कान की बलिया लिए।। हार कंगण संग में। चूड़ियाँ नवरंग में।। नारियों के देश में । श्याम नारी…

कलह-मनु कुमारी

प्रेम से बनता स्वर्ग सा घर है,कलह से बिखरता संसार। कलह से अगर बचना है तो, नि:स्वार्थ प्रेम कर रिश्तों से यार।। ईर्ष्या, द्वेष का जब धुंआ उठे, तब दिलों…

देवी अवतारी -जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’

संसार की माता बन  संतानों को पालती हैं,  सृष्टि की कीमती रत्न, दुनिया में नारी है। घर हो या राजनीति  तालमेल बैठाती है,  जीवन सफ़र पर, कभी नहीं हारी है।…