Dharmendra Kumar Thakur

अविराम’ – धर्मेंद्र कुमार ठाकुरअविराम’ – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर

0 Comments 9:23 pm

‘अविराम’ – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर थक चुका है यह तन, पर सांस अभी विस्मित है, हर पग पर मिल रही,[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Dharmendra Kumar Thakur

काव्य-मुहावरा मंजरी – धर्मेंद्र कुमार ठाकुरकाव्य-मुहावरा मंजरी – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर

0 Comments 9:18 pm

काव्य-मुहावरा मंजरी – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर यहाँ हिंदी के कुछ प्रसिद्ध मुहावरों और लोकोक्तियों को काव्य (कविता) के रूप में[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Archna Kumari

दुर्गास्वरुपिणी बिटिया रानी – बेबी अर्चनादुर्गास्वरुपिणी बिटिया रानी – बेबी अर्चना

0 Comments 9:13 pm

दुर्गास्वरुपिणी बिटिया रानी – बेबी अर्चना हे दुर्गास्वरूपिणी मेरी बिटिया रानी आओ सुनाऊँ तुझे मैं एक कहानी नन्हें पाँव तेरे[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Kartik Kumar

स्वाभिमान, सत्य और सेवा का संकल्प – कार्तिक कुमारस्वाभिमान, सत्य और सेवा का संकल्प – कार्तिक कुमार

0 Comments 9:07 pm

स्वाभिमान, सत्य और सेवा का संकल्प – कार्तिक कुमार सत्य राह का पथिक हूं मैं सत्य की राह का पथिक[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें

फिर रावण जलेगा – संजीत कुमार निगमफिर रावण जलेगा – संजीत कुमार निगम

0 Comments 8:54 pm

फिर रावण जलेगा – संजीत कुमार निगम आज फिर रावण जलेगा, हाँ, वही रावण, जिसे त्रेता से हर साल जलाया[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Dharmendra Kumar Thakur

दशहरे का दिव्य पंछी – धर्मेंद्र कुमार ठाकुरदशहरे का दिव्य पंछी – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर

0 Comments 8:38 pm

दशहरे का दिव्य पंछी – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर कंठ नीला, रूप सुंदर, शिव का ही वो वास है, दशहरे के[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें

दशहरा – बेबी अर्चना दशहरा – बेबी अर्चना 

0 Comments 9:50 pm

दशहरा – बेबी अर्चना  करते बस दहन हम पुतले, पर जलता नहीं मन का द्वेष। तभी तो पल-पल, प्रतिपल, रहता[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Dharmendra Kumar Thakur

शाश्वत नियम – धर्मेंद्र कुमार ठाकुरशाश्वत नियम – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर

0 Comments 9:45 pm

शाश्वत नियम – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर शिखर पर बैठ ओ पथिक! तनिक तू किसपे इतराता? बनाकर काँच के भवनों को,[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Dharmendra Kumar Thakur

काव्य का आभूषण: अलंकार – धर्मेंद्र कुमार ठाकुरकाव्य का आभूषण: अलंकार – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर

0 Comments 9:41 pm

काव्य का आभूषण: अलंकार – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर शब्दों का जब चमत्कार हो, कविता की बढ़ती शान। भाषा सुंदर रूप[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें

दुर्गा माँ – रंजना कुमारीदुर्गा माँ – रंजना कुमारी

0 Comments 9:34 pm

दुर्गा माँ – रंजना कुमारी माँ, तुम तो शक्ति की देवी हो, तुम्हारे नौ रूपों में नारी की महिमा गाते[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें