Dharmendra Kumar Thakur

पथ अपना अपना – धर्मेन्द्र कुमार ठाकुरपथ अपना अपना – धर्मेन्द्र कुमार ठाकुर

0 Comments 10:06 pm

पथ अपना अपना – धर्मेन्द्र कुमार ठाकुर जीवन के इस महासमर में, कोटि-कोटि राही चलते हैं, सबके अपने-अपने पथ हैं,[...]

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Dharmendra Kumar Thakur

वर्णमाला बोध काव्य – धर्मेन्द्र कुमार ठाकुरवर्णमाला बोध काव्य – धर्मेन्द्र कुमार ठाकुर

0 Comments 9:13 pm

वर्णमाला-बोध काव्य- धर्मेन्द्र कुमार ठाकुर कमल ‘क’ से विकसित हो मन में, पढ़ो निरंतर पल-पल तुम, खिसके जब खरगोश ‘ख’[...]

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Dharmendra Kumar Thakur

भिक्षुक – धर्मेन्द्र कुमार ठाकुरभिक्षुक – धर्मेन्द्र कुमार ठाकुर

0 Comments 7:20 pm

भिक्षुक – धर्मेन्द्र कुमार ठाकुर कहते हैं लोग यहाँ अब न कोई दरिद्र रहा, सबकी तिजोरी भर गई, कोई न[...]

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Ptiyanka Kumari Verma

हृदय की पुकार- कुमारी प्रियंका वर्माहृदय की पुकार- कुमारी प्रियंका वर्मा

0 Comments 5:53 pm

हां समझो मुझको इसके पहले कि भाव शून्य ना बन जाऊ,, नित जीवन के संघर्षों से , हां अंतर्मन के[...]

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Dharmendra Kumar Thakur

गणित का असली सार – धर्मेन्द्र कुमार ठाकुरगणित का असली सार – धर्मेन्द्र कुमार ठाकुर

0 Comments 5:42 pm

शून्य कहे—”मैं खाली हूँ,” पर पीछे लगकर मान बढ़ाता। एक अकेला जब आ जाए, शुरुआत नई वह कर जाता। शून्य[...]

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मेरी माँ – कुमारी मधुमेरी माँ – कुमारी मधु

0 Comments 5:30 pm

मन के कोने में एक झनकार सी उभरती है, सूखती आंखें,कांपते होठ,फिर भी ममता मयी चेहरा लिए मुझे सुबह शाम[...]

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Dharmendra Kumar Thakur

ज से म तक – धर्मेन्द्र कुमार ठाकुरज से म तक – धर्मेन्द्र कुमार ठाकुर

0 Comments 5:05 pm

जन्म से मरण: महाकाल का असीम चक्र सृष्टि के आदिम सन्नाटे को चीर कर, जब ‘ज’ का पहला स्पंदन गूंजा[...]

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Punam Kumari

मैं एक बिखरी दास्तान हूँ-पुनम कुमारीमैं एक बिखरी दास्तान हूँ-पुनम कुमारी

0 Comments 8:04 pm

  मैं एक बिखरी दास्तान हूँ, कुछ अधूरे ख़्वाबों का नाम हूँ। कभी हँसी में छुपा दर्द हूँ, कभी ख़ामोशी[...]

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Dharmendra Kumar Thakur

मूक वेदना और स्वर्ण मंडी-धर्मेंद्र कुमार ठाकुर मूक वेदना और स्वर्ण मंडी-धर्मेंद्र कुमार ठाकुर 

0 Comments 7:56 pm

मूक वेदना और स्वर्ण मंडी-धर्मेंद्र कुमार ठाकुर  मौन खड़ी प्रकृति रोती है, अंबर से झरते आँसू, पवित्र लगन की वेदी[...]

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Punam Kumari

बच्चों तुम फूल मेरे, बागवान के — पुनम कुमारीबच्चों तुम फूल मेरे, बागवान के — पुनम कुमारी

0 Comments 7:03 pm

बच्चों तुम फूल मेरे, बागवान के — पुनम कुमारी बच्चों, तुम फूल मेरे, विद्यालय बागवा, तुमसे ही महके सदा, मेरा[...]

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