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नारी तू अबला नहीं

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नारी तू अबला नहीं

 

नारी नहीं तू अबला है

तू ही तो सबला है।

 

बिन तेरे सब सूना है,

सबकुछ तूने गूना है।

 

रही नहीं तू चाकरी,

अब तो इसको भांप री।

 

तू भरणी तू जननी है,

तेरी कहानी कहनी है।

 

तू दुर्गा सब जानी है,

तू झांसी की रानी है।

 

तू काली चामुंडा है,

पहने नर-मुंडा है।

 

तू सरस्वती माता है,

तू ही विद्या दाता है।

 

तू लक्ष्मी सावित्री है,

तू ही मां गायत्री है।

 

तू गंगा का रुप है,

सब तेरा स्वरुप है।

 

तू उमा तू शक्ति है,

देती हमको भक्ति है।

 

नारी खुद को जान ले,

स्वशक्ति पहचान ले।

 

स्वशक्ति पहचान ले,

स्वशक्ति पहचान ले।

 

नारी नहीं तू अबला है,

तू ही तो सबला है।

 

Brajesh Kumar Verma

Head Teacher

P. S. Panapur Gosai Tola,

Minapur, Muzaffarpur

 

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Brajesh Kumar Verma

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