Category: sandeshparak

दादा और पोते के संवाद-दिलीप गुप्ता ‘दीप’दादा और पोते के संवाद-दिलीप गुप्ता ‘दीप’

दादा और पोते के संवाद दादा यहां तू कैसे आए, कौन ले आया तुमको। तुम बिन रहे उदास सदा, क्या एहसास है तुमको। मेरा बचपन कट जाता था, खेल-खेल कर तेरे संग में। बहुत उदास लगे है मुझको, अब न रहूँगा मैं उस घर में। बोले मम्मा डैड थे मुझको, तुम तो गए हो रिश्ते […][...]

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मैं प्रचण्ड प्रबला हूँ-मनु कुमारीमैं प्रचण्ड प्रबला हूँ-मनु कुमारी

मैं प्रचण्ड प्रबला हूँ मैं अबला नहीं ! प्रचण्ड प्रबला हूँ। मैं ब्रह्मचारिणी और पतिव्रता, कहो शिव की वामांगी या जनक सुता। मैं प्रेम की जननी, हूँ जगत वंदिनी , भवप्रीता हूँ भवमोचिनी। परम तेजस्विनी मैं, अहंकारियों के अहं एवं असुरों के खड्ग को, तिनकों से मिटाने वाली ज्वाला हूँ। मैं अबला नहीं! प्रचण्ड प्रबला […][...]

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ईश्वर का वरदान है बेटी-ब्यूटी कुमारीईश्वर का वरदान है बेटी-ब्यूटी कुमारी

ईश्वर का वरदान है बेटी बेटी हूं तो क्या हुआ क्यों करते हो भेदभाव? मुझे धरा पर आने दो अवसर का लाभ उठाने दो वह करके मैं दिखाऊंगी दुनिया वाले को सीखलाऊंगी मैं किसी से कम नहीं। बेटी हूं तो क्या हुआ क्यों करते हो भेदभाव? बेटी को पढ़ने का अवसर दो आगे बढ़ने का […][...]

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एक बेटी के मन की व्यथा-सुरेश कुमार गौरवएक बेटी के मन की व्यथा-सुरेश कुमार गौरव

एक बेटी के मन की व्यथा हे समाज के कर्णधार! सदियों से मुझे पढ़ने की मनाही है लिंगभेद और भेदभाव की यह तो सदियों पुरानी कहानी है मैं भी पढ़ना चाहती हूं जीवन को खुद भी संवारना चाहती हूं अपने स्वप्निल उड़ान को अवश्य पूरा कर दिखलाना चाहती हूं। मुझमें कुछ करने की लगन है […][...]

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वल्लभ भाई पटेल-अश्मजा प्रियदर्शिनीवल्लभ भाई पटेल-अश्मजा प्रियदर्शिनी

वल्लभ भाई पटेल जिनकी प्रतिभा से गौरवान्वित देश हमारा हिन्दुस्तान। ऐसे प्रखर वो राजनेता, जननायक थे वो महान। अपने कृतित्व से बने भारत माता की शान। आजादी के दीवाने स्वतंत्रता सेनानियों में प्रधान। वल्लभ भाई कहूँ या कहूँ झाबेरभाई पटेल। बाइस वर्ष में मैट्रिक किया और तीस महिने में हीं वकालत कर अपनी प्रतिभा का […][...]

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नारी-सोनी कुमारी कुशवाहानारी-सोनी कुमारी कुशवाहा

नारी नारी सृष्टि का आधार। नारी से ही है जगत का कल्याण।। नारी बिना सूना है, ये सारा संसार। बिना नारी चले न एक भी काम।। प्रेम, दया की मूरत वह, त्याग की है खान। हर रिश्ते की ताकत, सब की मिसाल।। उठा ले पुस्तक, कलम यही तेरी ताकत महान। अपने पंख खुद लगाकर तू […][...]

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पेड़-पौधे हैं जरुरी-सुरेश कुमार गौरवपेड़-पौधे हैं जरुरी-सुरेश कुमार गौरव

पेड़-पौधे हैं जरुरी  धरती पर पेड़-पौधे को हमेशा ही उगाईए जीवन पारिस्थितिक तंत्र को भी बचाईऐ ! 🌲 देते फल-फूल, औषधि, जरुरी जड़ी-बूटियां आक्सीजन देती है इसे अपना मित्र बनाईए! 🌳 सबके लिए है जल-जीवन और हरियाली यह संदेश जन-जन तक है खूब फैलाईए! 🌿 धरती पर पेड़-पौधे को हमेशा ही उगाईऐ जीवन पारिस्थितिक तंत्र […][...]

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दिनकर की धड़कन-कुमारी निरुपमादिनकर की धड़कन-कुमारी निरुपमा

दिनकर की धड़कन परिवेश गुलामी शोषण का दौर अशिक्षा और अंधविश्वास का त्राण दिलाने आए दिनकर जी यहां अपने संवेगधर्मी काव्य धारा से मिली प्रेरणा कबीर संस्कार तुलसी का छायावाद की कोमलता और संघर्ष का युग की पीड़ा को झेला किया हुंकार प्रण भंग से किया काव्य की शुरुआत राष्ट्रीयता को गति मिली हुंकार को […][...]

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रिश्तों का मेला-मनु कुमारीरिश्तों का मेला-मनु कुमारी

रिश्तों का मेला सबसे सुंदर, सबसे मनहर, होता यह रिश्तों का मेला, मिलजुल कर सब हँसते-गाते, प्यार बाँटते जश्न मनाते, कोई न रहता यहाँ अकेला। रिश्तों का यह अनुपम मेला… समाज की सबसे छोटी इकाई, परिवार से होता इसका निर्माण, आपस में सब मिलकर रहते, खट्टी-मीठी बातें करते, लुटाते सभी इक दूजे पर जान। रिश्तों […][...]

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एक शिक्षकीय विद्यालय का एक शिक्षक-सैयद जाबिर हुसैनएक शिक्षकीय विद्यालय का एक शिक्षक-सैयद जाबिर हुसैन

एक शिक्षकीय विद्यालय का एक शिक्षक एक से तीन, तीन से पांच, पांच से वर्ग एक। इसी में उलझता-सुलझता रहता है।। एक शिक्षकीय विद्यालय का एक शिक्षक। व्यथा न कहना उसकी मजबूरी है, परीक्षाओं की घड़ी से गुजरता हुआ, पाठ्यक्रम, पाठ्यचर्या सा उसका सुलझता नहीं है दिनचर्या।। न ही उसका कोई है रक्षक, एक शिक्षकीय […][...]

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