कागज के फूल कागज़ के जो फूल हैं, सुंदर दिखते आज। खुशबू इनमें है नहीं, फीका सारा काज।। चेहरे पर[...]
Category: sandeshparak
Sandeshparak poems are poems that are used to convey a message with feelings. Through poems, statements related to the country, the world, and society are transmitted to the people. Teachers of Bihar give an important message through the Sandeshparak of Padyapankaj.
धुंध और सूरज”धर्मेंद्र कुमार ठाकुरधुंध और सूरज”धर्मेंद्र कुमार ठाकुर
“धुंध और सूरज” मन की थकी परछाईं है यह, केवल पल की तन्हाई। यह कोई स्थाई हार नहीं, मत मानो[...]
शहीद महाराणा प्रताप।_ नीतू रानीशहीद महाराणा प्रताप।_ नीतू रानी
शहीद महाराणा प्रताप। विषय -वीर गाथा 6.0 शीर्षक -राणा प्रताप को पढ़ लेना। महाराणा प्रताप के पिता महाराणा उदय सिंह[...]
दीपों का उत्सव तभी सुहाए, जब कूड़ेदान को उपहार मिले। – उमेश कुमार सिन्हा ” “निर्देशक “दीपों का उत्सव तभी सुहाए, जब कूड़ेदान को उपहार मिले। – उमेश कुमार सिन्हा ” “निर्देशक “
शीर्षक :- दीपों का उत्सव तभी सुहाए, जब कूड़ेदान को उपहार मिले। – उमेश कुमार सिन्हा ” “निर्देशक ” दीपोत्सव[...]
दीप पर्व का शाश्वत सत्य-धर्मेंद्र कुमार ठाकुरदीप पर्व का शाश्वत सत्य-धर्मेंद्र कुमार ठाकुर
कार्तिक की वह सघन अमावस, अज्ञान का छाया था डेरा, पर यम के द्वारे चमक रहा था, नचिकेता का बाल-सवेरा।[...]
तत्व-काया-धर्मेंद्र कुमार ठाकुरतत्व-काया-धर्मेंद्र कुमार ठाकुर
पंच तत्व से बनी है काया, जिसने सारा संसार रचाया। पृथ्वी की गोदी, जल की धारा, अग्नि का तेज, वायु[...]
कलम के कर्मवीरों का गौरवगान-उमेश कुमार सिन्हा “निर्देशक “कलम के कर्मवीरों का गौरवगान-उमेश कुमार सिन्हा “निर्देशक “
यह शब्दों का वैभव नहीं, संस्कृति का अभिमान है, पद्यपंकज की साधना, साहित्य का जयगान है। अमितेश की वाणी में[...]
स्याही के पदचिह्न – धर्मेंद्र कुमार ठाकुरस्याही के पदचिह्न – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर
स्याही के पदचिह्न – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर पत्तों पर लिखे संदेशों से, जब बात हवा तक जाती थी, शासक की[...]
ई-कचरा: सजगता – धर्मेंद्र कुमार ठाकुरई-कचरा: सजगता – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर
ई-कचरा: सजगता – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर खराब, पुराने, बंद पड़े जो, बिजली के सामान हैं, मोबाइल, टीवी, कंप्यूटर, फ्रिज, ई-कचरे[...]
ध्वनि एक अर्थ अनेक – धर्मेंद्र कुमार ठाकुरध्वनि एक अर्थ अनेक – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर
ध्वनि एक, अर्थ अनेक – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर सुनने और पढ़ने में जो, लगते एक समान। पर अर्थों की दृष्टि[...]
