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आइए, हनुमान जी का ध्यान धरें -उमेश कुमार सिन्हा ‘ निर्देशक ‘

Umesh kumar sinha

श्रीराम के अनन्य सेवक हनुमान !

आइए, हम हनुमान का ध्यान धरें,

नतमस्तक होकर उनसे आशीर्वाद माँगें।

बल, बुद्धि, विद्या का वरदान मिले,

मन से कभी न अभिमान करें।

आइए, हम हनुमान का ध्यान धरें,

नतमस्तक होकर उनसे आशीर्वाद माँगें।

प्रथम प्रसंग : किष्किंधा में प्रभु से मिलन

सुग्रीव के दूत बनकर किष्किंधा में आए,

प्रभु श्रीराम को देख हनुमान हर्षाए।

वाणी की मधुरता से प्रभु का मन जीत लिया,

उनके परिचय ने भक्ति का दीप जला दिया।

पहचान लिया प्रभु को, हृदय में प्रेम उमंग,

कंधों पर बैठाकर सुगम किया पथ का प्रसंग।

सुग्रीव से मित्रता कराने में सहयोग किया,

प्रभु के हर कार्य में अपना जीवन अर्पित किया।

आइए, हम हनुमान का ध्यान धरें,

नतमस्तक होकर उनसे आशीर्वाद माँगें।

द्वितीय प्रसंग : समुद्र लाँघकर लंका पहुँचना

अपनी बुद्धि और विद्या का अद्भुत परिचय दिया,

समुद्र लाँघकर माता सीता का पता लिया।

लंकिनी से भेंट हुई, लंका में प्रवेश किया,

राम-नाम की महिमा का वहाँ संदेश दिया।

विभीषण से मिलकर सीता का पता पाया,

अशोक वाटिका में प्रभु का संदेश सुनाया।

अक्षय कुमार को युद्ध में परास्त किया,

रावण की स्वर्ण-लंका को अग्नि से दग्ध किया।

आइए, हम हनुमान का ध्यान धरें,

नतमस्तक होकर उनसे आशीर्वाद माँगें।

तृतीय प्रसंग : रावण को चेतावनी

रावण की सभा में प्रभु का संदेश सुनाया,

अधर्म छोड़ने का उसको मार्ग दिखाया।

हर कार्य को प्रभु का प्रताप ही समझते,

महाबली होकर भी कभी अभिमान न करते।

प्रभु की सेवा में अपना सर्वस्व लगाया,

धर्म की रक्षा का पावन संदेश सुनाया।

राम-काज के आगे सब कुछ तुच्छ मानते,

प्रभु की कृपा को ही अपनी शक्ति जानते।

आइए, हम हनुमान का ध्यान धरें,

नतमस्तक होकर उनसे आशीर्वाद माँगें।

चतुर्थ प्रसंग : संजीवनी बूटी

जब लक्ष्मण को शक्ति-बाण ने घायल कर दिया,

राम-दल के हृदय में चिंता का सागर भर दिया।

वैद्य सुषेण ने संजीवनी का उपाय बताया,

हनुमान ने तत्क्षण हिमालय का मार्ग अपनाया।

रावण की माया ने राह में विघ्न लगाया,

कालनेमि ने छल से उनको भरमाया।

माया को पहचानकर दुष्ट का अंत किया,

संजीवनी के लिए पूरा पर्वत उठा लिया।

सूर्योदय से पहले औषधि लेकर आए,

लक्ष्मण के प्राण बचाकर सबके मन हर्षाए।

धर्म की रक्षा में अपना सर्वस्व लगाया,

प्रभु श्रीराम का विश्वास सफल बनाया।

आइए, हम हनुमान का ध्यान धरें,

नतमस्तक होकर उनसे आशीर्वाद माँगें।

पंचम प्रसंग : नागपाश और अहिरावण

मेघनाद ने जब नागपाश में दोनों भाइयों को बाँधा,

राम-दल पर छा गया संकट, सबने धैर्य सँभाला।

गरुड़ के आगमन से नागपाश का बंधन टूटा,

प्रभु के चरणों से भक्तों का विश्वास न छूटा।

अहिरावण जब दोनों भाइयों को पाताल ले गया,

हनुमान का पराक्रम वहाँ भी अपना रंग दिखा गया।

दुष्ट अहिरावण का अंत कर प्रभु को मुक्त कराया,

राम-लक्ष्मण को सकुशल रणभूमि में लाया।

आइए, हम हनुमान का ध्यान धरें,

नतमस्तक होकर उनसे आशीर्वाद माँगें।

षष्ठम प्रसंग : हृदय में श्रीराम और माता सीता

रावण से युद्ध में भी प्रभु का साथ निभाया,

धर्म की विजय का पावन जयघोष सुनाया।

नित्य प्रभु की सेवा में अपना जीवन बिताया,

अपने पराक्रम से हर संकट को दूर भगाया।

सीना चीर प्रभु को हृदय में विराजमान दिखाया,

राम-सिया की छवि से अपना प्रेम जताया।

माता सीता के वर से सिंदूर का महत्त्व पाया,

प्रभु की लंबी आयु हेतु तन पर सिंदूर लगाया।

कलियुग में भी भक्तों के संकट हरते हैं,

श्रीराम की कृपा से सबके कष्ट हरते हैं।

संकटमोचन नाम आपका जग में विख्यात है,

भक्तों के हृदय में आपका पावन वास है।

आइए, हम हनुमान का ध्यान धरें,

नतमस्तक होकर उनसे आशीर्वाद माँगें।

सप्तम प्रसंग : तुलसीदास और हनुमान जी की महिमा

गोस्वामी तुलसीदास ने राम-कथा सुनाई,

हनुमत-कृपा से प्रभु-दर्शन की आस लगाई।

राम-नाम की महिमा का जग में मान बढ़ाया,

भक्ति के पथ पर चलकर प्रभु का प्रेम पाया।

अष्ट सिद्धि, नव निधि के दाता कहलाते हैं,

भक्तों के जीवन में मंगल दीप जलाते हैं।

सच्चे मन से जो भी आपका ध्यान लगाता है,

आपकी कृपा से साहस और विश्वास पाता है।

बालकों के मन में भी भक्ति का दीप जलाएँ,

सत्य, साहस और सेवा के संस्कार जगाएँ।

प्रभु श्रीराम के चरणों में नित्य प्रेम रहे,

हमारे हृदय में सदा आपका नेह रहे।

आइए, हम हनुमान का ध्यान धरें,

नतमस्तक होकर उनसे आशीर्वाद माँगें।

स्वरचित रचनाकार:-

उमेश कुमार सिन्हा ‘ निर्देशक ‘

डिसेंट एकेडमी वाया स्कूल रघुनाथपुर 

बिहार सरकार द्वारा पूर्णतः स्वीकृत विद्यालय 

तुलसी पथ लालापुल रघुनाथपुर 

अंचल – ब्रह्मपुर

जिला – बक्सर

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