Category: Bhakti

नमन करें-स्नेहलता द्विवेदी ‘आर्या’नमन करें-स्नेहलता द्विवेदी ‘आर्या’

नमन करें विश्व के इस भाल को, उदग्र इस त्रिकाल को, विश्व गुरु के मान को, नमन करें नमन करें। वेद की ऋचा जहाँ, सहस्त्र तान छेड़ती, विश्व के कल्याण की, है कोटि यज्ञ देखती। नमन करें नमन करें… धर्म के विधान को, बुद्ध सम्यक ज्ञान को, महावीर मार्ग को, नानक गुरु के ज्ञान को। […][...]

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तिरंगा हमारी शान-रूचिकातिरंगा हमारी शान-रूचिका

तिरंगा हमारी शान तीन रंग का है तिरंगा बने हमारी शान, हम सबके देश की यह बनती पहचान, राजू मुन्नी दीपू सुन लो, नहीं रहो अंजान, तिरंगे की रक्षा करो, देश बने महान। केसरिया सफेद हरा तीन रंग है दर्शाता, शौर्य शांति प्रगति का प्रतीक बन जाता, गतिशील रहो तुम जीवन में सदा ही, चक्र […][...]

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गुरु गुरु कहिए-मनु कुमारीगुरु गुरु कहिए-मनु कुमारी

गुरु गुरु कहिए प्रात काल उठि गुरु-गुरु कहिए! गुरु पुरे का नाम सुमरि के, मन को वश में करिये। यह मन तो है बड़ा खुरफंद, बाहर भागे, रहे स्वच्छंद। प्रत्याहार करके पुनि-पुनि, मन को वापस लाईये। प्रात काल उठि गुरु-गुरु कहिए। गुरु की मूरति मन में धरिये। मानस जाप मनहिं मन करिये। दृष्टि साधन के […][...]

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आर्तवाणी से पुकारा-जैनेन्द्र प्रसाद रविआर्तवाणी से पुकारा-जैनेन्द्र प्रसाद रवि

आर्तवाणी से पुकारा मेरे मोहन इन चरणों की अब तो दे दो सहारा। बिना मांझी यह जीवन नैया कैसे लगे किनारा।। जड़ चेतन सब तेरी माया, कण-कण में तू है समाया, जुगनू में तू आभा बन गए, फूलों ने गंध तुमसे है पाया। सूरज बनकर प्रकाशित होता, है दूर करता अंधियारा।। हास और परिहास में […][...]

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सद्गुरु शत शत तुम्हे प्रणाम-दिलीप कुमार गुप्तसद्गुरु शत शत तुम्हे प्रणाम-दिलीप कुमार गुप्त

सद्गुरु शत शत तुम्हे प्रणाम  हे गुरुवर, हे दयानिधे! आपके हैं अनंत उपकार आत्मज्ञान की ज्योति जलाकर सदज्ञान का पियूष पिलाकर मानवता का किया उद्धार सद्गुरु शत शत तुम्हे प्रणाम। हे सद्गुरु, हे करूणावतार! आपकी महिमा अपरम्पार कुबुद्धि को सद्बुद्धि बनाकर उर अंधियारा दूर भगाकर संशय मिटा किया उद्धार सद्गुरु शत शत तुम्हे प्रणाम। हे […][...]

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गुरु की महिमा-बबीता चौरसियागुरु की महिमा-बबीता चौरसिया

गुरु की महिमा बाल पुष्प संग मिलकर गुरू उपवन नया बसाते हैं घर-घर में दीप जलाकर गुरू अंधियारा दूर भगाते हैं। हर कठिन पगडंडी पर गुरु चलना सिखाते हैं नस नस में उर्जा भरकर स्फूर्त नव शक्ति जगाते हैं। गुरु ब्रह्म के रूप में भी गुरु विष्णु की साया हैं गुरु पर न कभी भारी […][...]

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युगपुरुष स्वामी विवेकानंद-मनु कुमारीयुगपुरुष स्वामी विवेकानंद-मनु कुमारी

युगपुरुष स्वामी विवेकानंद गुरु सेवाकर जिसने अपने जीवन में था सबकुछ पाया, जीवनकाल में हीं जिसने मृत्यु के रहस्य को ढूंढ निकाला, निज मुक्ति से बढ़कर जिसने राष्ट्र सेवा को लक्ष्य बनाया, करोड़ों देशवासियों के जीवन उत्थान के लिए, जिसने अपना तन-मन और जीवन को लगाया, उस मनुज श्रेष्ठ, आदर्श श्रेष्ठ, कर्तव्यनिष्ठ को करें नमन। […][...]

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चौपाई-देव कांत मिश्र दिव्यचौपाई-देव कांत मिश्र दिव्य

केवट कथा आएँ निर्मल कथा सुनाएँ। भक्तों का हम मान बढ़ाएँ।। राम कथा में ध्यान लगाएँ। मनहर सुखद शांति नित पाएँ।। नाविक था गरीब वह केवट। नौका गंगा करता खेवट।। भक्ति हृदय वह प्रभु का करते। नाम लेत वह पार उतरते।। नौका छोटी इनकी भाई। इसमें जीवन सदा समाई।। राम लखन सिय जब तट आए। […][...]

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गुरु-मनोज कुमार मिश्रगुरु-मनोज कुमार मिश्र

गुरु गुरु तुम्हारे नाम की, महिमा क्या समझाय। समझने की समझ भी, गुरु तुम्हीं से आय।। गुरु बिन ज्ञान मिले नहीं, प्रकट न होवे भाव। गुरु ही अक्षर ज्ञान दे, गुरु ही बदले स्वभाव।। गुरु सिखावें योग तप, दे दया धर्म का ज्ञान। गुरु बिन कहो कैसे मिले, मान और सम्मान।। गुरु है तो उजियारा […][...]

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जय गंगा मैय्या-कुमकुम कुमारी ‘काव्याकृति’जय गंगा मैय्या-कुमकुम कुमारी ‘काव्याकृति’

जय गंगा मैय्या हर हर गंगे, नमामि गंगे। पतितपावनी, मोक्षदायिनी गंगे। भगीरथ के तपोबल से गंगा, वैकुण्ठ छोड़ धरा पर आई। महादेव के जटा में समाकर, निर्मल धार धरा पर बहाई। हर-हर गंगे, नमामि गंगे। पतितपावनी, मोक्षदायिनी गंगे। इसकी महिमा है अति भारी, वेदों ने यह बात बताई। अपनी निर्मल जलधारा से गंगा, सगर पुत्रों […][...]

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