होली आई होली आई,
रंग सारे साथ लाई,
नीर भी रंगीन हुआ,भीग गया अंग है।
कीचड़ उछाल रहे,
करते वबाल रहे,
कहाँ माने रुके नहीं,मन में उमंग है।
ढोल तासे मंजीरे से,
निकले मधुर थाप,
साथी सारे बोल रहे,गलियारे तंग है।
सांसों में उसका नाम,
कृष्ण ने रचाये भाव,
प्रीत भरी पिचकारी,लड़ रहे जंग है।
(💐2💐)
पछुआ पवन चले,
अंग-अंग हर्ष भरे,
पत्तियों की सरसर,छिडकें गुलाल है।
कुँज-कुँज धमाल है,
गली-गली भी लाल है,
निखरा कपोल भी है,रंगत भी लाल है।
पूनम की उज्वल छटा,
गीत गाते फाल्गुन के,
आगे राह भूल गए,मेघपुष्प ताल है।
यमुना की लहर से,
वृंदावन भीग गया,
भीग गई श्यामा सारी,मथुरा का हाल है।
एस.के.पूनम
सेवानिवृत्त शिक्षक,फुलवारी शरीफ, पटना
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