धनरूपाय सौम्याय महनीयगुणात्मने।
शर्वाय नीलवर्णाय शनिदेवं नमाम्यहम्।।
विरूपाक्षाय वेद्याय आयुष्यकारणाय च।
भावुकदाय श्रेष्ठाय शनिदेवं नमाम्यहम्।।
कालदाय कवींद्राय गोचराय कलाय च।
त्रिगुणाय त्रिनेत्राय शनिदेवं नमाम्यहम्।।
अचञ्चलाय नित्याय वीतरोगभयाय च।
विधिरूपाय वीराय शनिदेवं नमाम्यहम्।।
भेदास्पदस्वभावाय कूर्माङ्गाय घनाय च।
खद्योताय वरिष्ठाय शनिदेवं नमाम्यहम्।।
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