कल्याण करते हैं जगत् का
शिव आदिदेव अनंत हैं
परब्रह्म हैं, परमेश्वर हैं
अनुप्राणित दिग्-दिगंत हैं ।
शिव गंड्ग की महिमा निराली
गौरा के प्रियवंत हैं
युगों-युगों से इक-दूजे के
निर्बाध प्रेम रसवंत हैं ।
अमर प्रेम का अपूर्व बंधन
हार्दिक स्नेह है अनश्वर
ज्ञान, शक्ति, निर्बाध भाव से
अनश्वर व पूर्णवन्त हैं ।
माँ शक्ति बिना शिव तो शव हैं
समर्पण का भाव निराला
अर्द्धनारीश्वर में अद्भुत
सद्गृहस्थ परम संत हैं ।
रत्ना प्रिया शिक्षिका (11 – 12)हिन्दी
उच्च माध्यमिक विद्यालय माधोपुर, चंडी ,नालंदा
0 Likes

