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टीचर्स ऑफ बिहार का साहित्यिक उपवन-उमेश कुमार सिन्हा, निर्देशक

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काव्य-पंक्तियों का कमल

खिल उठा है मंच पर,
लेकर कविताओं की सुगंध।
सुगंध का प्रेमी भँवरा
गुनगुना रहा भावात्मक शब्दों से।

अनोखी कविता देखी है,
इतना भावुक हुआ कि जानना चाहा—
“किनके मंच की यह बागवानी है?”

मैंने भावों को पान करने की ठानी है।
सुसंगठित कविताओं ने कहा—
“पदपंकज—टीचर्स ऑफ बिहार!”

तब गद्य की गूँज सुनाई दी।
उड़ा उसी क्षण गद्य-गुंजन की डाली पर बैठा।
लेखन, आलेख, निबंध, प्रेरणादायक कहानियों से
उसके मन का आकर्षण बढ़ आया।

फिर कहा—
“किसका मंच? कौन साहित्य की गूँज?”
नज़र पड़ गई—
“गद्य-गुंजन—टीचर्स ऑफ बिहार!”

भँवरे ने कविता से भाव दिया—

“जहाँ भावपूर्ण, भक्तिपूर्ण,
प्रेमपूर्ण, प्रेरणादायक,
शैक्षणिक कविताएँ रचते विद्वान शिक्षक—
वह है पदपंकज, टीचर्स ऑफ बिहार,
है हमारा साहित्यिक मंच।

जहाँ गद्य-गुंजन के डिजिटल पन्नों पर
प्रेरणादायक कहानियाँ लिखी जाती हैं,
जहाँ आलेख, निबंध और कहानियाँ सुनकर
विद्यार्थी, पाठक प्रेरणा लेते हैं—
गद्य-गुंजन, टीचर्स ऑफ बिहार,
है हमारा साहित्यिक मंच।

जहाँ भावात्मक, शैक्षणिक,
संदेशप्रद कविताएँ रची जाती हैं—
वह है हमारा साहित्यिक मंच—पदपंकज,
टीचर्स ऑफ बिहार।

इस मंच की कविता-कहानी का क्या कहना!
जहाँ कविता और कहानियों की लेखनी निखरती है—
वह है टीचर्स ऑफ बिहार का साहित्यिक मंच।

जहाँ लेखनी प्रसन्न हो निखरती है,
जहाँ शब्दों में भाव और सद्भावना,
भावों में संस्कार बसते हैं;
जहाँ प्रत्येक प्रतिभागी की प्रतिभा सँवरती है,
जहाँ शब्दों से ज्ञान-विज्ञान की ज्योति जलती है;
जहाँ मंच की टीम रचनाओं की शोभा बढ़ाती है—
वह साहित्यिक उपवन है हमारा,
वही है हमारा अद्वितीय, निराला
टीचर्स ऑफ बिहार का साहित्यिक मंच।”

भावार्थ

इस रचना में टीचर्स ऑफ बिहार के दो साहित्यिक मंचों—“पदपंकज” और “गद्य-गुंजन”—की साहित्यिक विशेषताओं को सुंदर रूपक के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।

कवि ने कविताओं को कमल और उनके भावों को सुगंध माना है। इस सुगंध से आकर्षित होकर भँवरा साहित्य-प्रेमी पाठक या लेखक का प्रतीक बन जाता है। वह पहले पदपंकज की कविताओं के उपवन में पहुँचता है, जहाँ उसे भावपूर्ण, भक्तिपूर्ण, प्रेमपूर्ण, प्रेरणादायक और शैक्षणिक कविताएँ दिखाई देती हैं। उन कविताओं में सद्भावना दिखाई देती है।

इसके बाद उसे गद्य-गुंजन की गूँज सुनाई देती है। वह वहाँ जाकर आलेख, निबंध और प्रेरणादायक कहानियों को देखता है। उसे अनुभव होता है कि ये रचनाएँ केवल मनोरंजन नहीं करतीं, बल्कि विद्यार्थियों और पाठकों को ज्ञान, संस्कार तथा प्रेरणा भी देती हैं।

अंत में भँवरा यह अनुभव करता है कि टीचर्स ऑफ बिहार केवल शिक्षकों का मंच नहीं, बल्कि साहित्यिक प्रतिभा को निखारने वाला एक सुंदर उपवन है, जहाँ कविता, कहानी, आलेख और निबंध जैसी विभिन्न विद्याओं में शिक्षक अपनी सृजनात्मक प्रतिभा को अभिव्यक्त करते हैं और मंच की टीम उन रचनाओं की शोभा बढ़ाती है।

संदेश

जहाँ शब्दों में सुगंध, भावों में संवेदना और लेखनी में प्रेरणा हो—वही सच्चा साहित्यिक उपवन है।

स्वरचित एवं मौलिक रचना
रचनाकार : उमेश कुमार सिन्हा ‘निर्देशक, डिसेंट एकेडमी वाया स्कूल, रघुनाथपुर
अंचल–ब्रह्मपुर, जिला–बक्सर

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उमेश कुमार सिन्हा

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