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कविता *बाल मनुहार*

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बाल मनुहार

मां यह मुझे बता दे!

आसमान क्यों है नीला

कैसे उड़ लेती है चिड़ियां

इस नील गगन में ऊपर

 

       झरनों में आता जल किधर से

      जो बहती है कल कल

सूरज दादा क्यों चमकते

इतनी दूर है फिर भी!!

 

हां मां, यह भी कह दे,,

चंदा मामा ही क्यों कहलाते

काका, बाबा नहीं क्यों!

तारे टिम टिम आसमान में

रातों को हीं करतें!!

सर सर करती हवा जो चलती

क्यों न हमको दिखलाई पड़ती ,

क्या है राज इन सब के पीछे

मां आज तू बतला दे!

 

स्वयंरचित

अमृता कुमारी

विद्यालय अध्यापक

उच्च माध्यमिक विद्यालय बसंतपुर सुपौल

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अमृता कुमारी

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