ये बात है उन नन्हें मन्नों की, मासूम सी भोली आँखों की। खेल ही जिनकी दुनिया है, ना फिक्र इन्हें[...]
Category: बाल कविता
बच्चों की शरारत – धर्मेंद्र कुमार ठाकुरबच्चों की शरारत – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर
सुबह सवेरे बजती घंटी, खुल जाते विद्यालय के द्वार, मानो टूट पड़ा हो धरती पर, नन्हें वीरों का संसार। लाखों[...]
दादा-दादी दिवस – उमेश कुमार सिन्हा दादा-दादी दिवस – उमेश कुमार सिन्हा
दादा-दादी की बचपन की बातें खूब मुझे याद आती हैं, गाँव में जाकर उनके संग खुशियाँ खूब मनाती हैं। जब[...]
चिडिया रानी -प्रियंका कुमारी पाण्डेय चिडिया रानी -प्रियंका कुमारी पाण्डेय
चिड़िया रानी चिड़िया रानी। मेरे घर भी ,[...]
थाली का इतराना-उमेश कुमार सिन्हा निर्देशक थाली का इतराना-उमेश कुमार सिन्हा निर्देशक
श्रावण की पूर्णिमा देख, थाली चाँद पर इतराती है— “देखो, कैसा चाँद मेरा शक्ल बनाया है!” राखी के त्योहार पर[...]
बचपन-बेबी अर्चना बचपन-बेबी अर्चना
अनायास ही आज मुझे स्मृत हो आया बचपन नैनों से अश्रु छलक पड़े कर याद वो सुनहरा क्षण रोम-रोम हर्षित[...]
खेल का मेला-कार्तिक कुमारखेल का मेला-कार्तिक कुमार
3:30 से खेला होगा, बैट-बॉल का मेला होगा। दूसरा और तीसरा का मैच, नहीं करेंगे आपस में बैच। मिल-जुलकर सब[...]
झूला झूलें-रत्ना प्रियाझूला झूलें-रत्ना प्रिया
सावन आया झूला झूलें, धरती से गगन को छू लें, काली बदरी नभ में छाई, रिम-झिम-रिम-झिम वर्षा आई, बच्चे समाते[...]
मेरा प्यारा खिलौना – कार्तिक कुमार मेरा प्यारा खिलौना – कार्तिक कुमार
मेरा प्यारा खिलौना – कार्तिक कुमार मेरा प्यारा खिलौना है, सबसे सुंदर, न्यारा है। लाल रंग की छोटी गाड़ी, चलती[...]
“ज्ञानी ककहरा “-संतोष कुमार“ज्ञानी ककहरा “-संतोष कुमार
क से कबूतर हम पढ़ते हैं, ख से खरगोश है, उजला – उजला, ग से गमला में पौधे लगाना, घ[...]
