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गुरु-शिष्य महिमा

गुरु-शिष्य महिमा

 

गुरु चाणक्य का सानिध्य पाकर,

चंद्रगुप्त मिशाल बना;

नंद वंश का नाश कर,

वह मगध सम्राट बना।

 

भद्रबाहु से शिक्षा पाकर,

प्रियदर्शी अशोक बना;

विश्वभर में बौद्ध धर्म का,

वह संदेशवाहक बना।

 

परशुराम ने कर्ण को,

महावीर योद्धा किया;

द्रोणाचार्य ने अर्जुन को,

सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर किया।

 

संदीपनी के आश्रम में,

कृष्ण जब शिक्षा लिये;

सर्वकलाओं से पूर्ण हो,

महा कूटनीतिज्ञ हुए।

 

विश्वामित्र वसिष्ठ ने,

राम का रामत्व किया;

मर्यादा पुरुषोत्तम हुए,

रावण का संहार किया।

 

भीलनी मिली गुरु मतंग,

उसका ज्ञान-वर्धन हुआ;

भगवत् आये उसकी कुटिया,

जीवन धन्य-धन्य हुआ।

 

धन्य-धन्य हे महागुरु,

शत्-शत् नमस्कार है;

शिष्यों पर कृपा करें,

ब्रजेश का मनुहार है।

 

 

ब्रजेश कुमार वर्मा

प्रधान शिक्षक, रा. प्रा. वि. पानापुर गोसाई टोला, मीनापुर, मुजफ्फरपुर

 

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