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चलो रे साथी चलो चलो

चलो रे साथी चलो चलो…
चलो चलो स्कूल चलो…
चलो रे साथी चलो चलो…
चलो चलो स्कूल चलो…

उठाओ बस्ता कदम बढ़ाओ, खुशियों के घर जाना है…
अंधियारे को दूर भगाकर, ज्ञान का दीप जलाना है।
चलो रे साथी चलो चलो…
चलो चलो स्कूल चलो
चलो रे साथी चलो चलो…
चलो चलो स्कूल चलो…

आज कलम से आशाओं की नई तस्वीर लिखेंगे हम।
रंग बिरंगे पन्ने पढ़कर, ख़ुद तकदीर गढ़ेंगे हम।
क ख ग से शुरू करेंगे, अम्बर तक उड़ जाना है….
चलो रे साथी चलो चलो ..
चलो चलो स्कूल चलो….
चलो रे साथी चलो चलो …
चलो चलो स्कूल चलो…
देखो सूरज द्वार खड़ा है, रश्मि का उपहार लिए…
देखो मंजिल बुला रही है, सपनों का संसार लिए….
हम सबको आलस्य छोड़कर, स्कूल तक चले जाना है…
चलो रे साथी चलो चलो….
चलो चलो स्कूल चलो…
चलो रे साथी चलो चलो …
चलो चलो स्कूल चलो…

​”देखो कितने प्यारे-प्यारे… राह देखते गुरु हमारे…
अक्षर को पतवार बनाकर, खींच भंवर से हमें उबारे।
जहाँ ज्ञान की गंगा बहती, उसी द्वार तक जाना है…
​चलो रे साथी चलो चलो…
चलो चलो स्कूल चलो…
चलो रे साथी चलो चलो …
चलो चलो स्कूल चलो…

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Kumar Amitabh

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