Category: बालपन की कविताओं का संकलन

बिहार अपनी समृद्ध सांस्कृतिक और भाषाई विविधता के लिए जाना जाता है। यहाँ की लोकभाषाएँ—
भोजपुरी, वज्जिका, मगही, मैथिली, अंगिका, बज्जिका, कुरमाली, खोरठा, पंचपरगनिया आदि—न केवल हमारी पहचान हैं, बल्कि हमारी परंपराओं, भावनाओं और जीवन शैली की जीवंत अभिव्यक्ति भी हैं।

इन्हीं लोकभाषाओं को संरक्षित और समृद्ध करने के उद्देश्य से NCERT द्वारा बाल साहित्य (विशेषकर बाल कविताओं) के संकलन की एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है, जिसमें Teachers of Bihar सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

अहंकार की दुर्गन्धअहंकार की दुर्गन्ध

0 Comments 11:56 am

अहंकार की दुर्गंध पैसा, पावर घूम-घूमकर, सबके माथे चूम रहा है. जिसे छू लिया इसने, उसका मन ही झूम रहा[...]

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कविता -: शीर्षक- “ज्ञानी ककहरा “कविता -: शीर्षक- “ज्ञानी ककहरा “

0 Comments 11:55 am

कविता -: शीर्षक – “ज्ञानी ककहरा” क, से कबूतर हम पढ़ते हैं, ख,से खरगोश है, उजला – उजला, ग, से[...]

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“पहली कक्षा के बच्चे” कविता“पहली कक्षा के बच्चे” कविता

0 Comments 11:54 am

पहली कक्षा के बच्चे, दिखते भोले- भाले, होते मन के सच्चे । पहली कक्षा के बच्चे, पहली कक्षा के बच्चे[...]

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अंगिका कविता ‘नानी घर जैबय’अंगिका कविता ‘नानी घर जैबय’

0 Comments 5:08 pm

नानी घर जैबय अबकी गरमी छुट्टी हमहु, नानी घर जैबय। नानी-नाना साथे हमहु, नदी में नहैबय।। नदी में नहैबय अउरो,[...]

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