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छठी की महिमा जैनेन्द्र प्रसाद रवि

Jainendra

Jainendra prasadRavi

जिसने चाहा वह फल पाया
हर सपना होता साकार है।
करते हैं हम सूरज उपासना
अति पावन छठ त्यौहार है।।

चार दिवसीय अनुष्ठान है होता
तीन दिनों का निर्जला उपवास,
स्वच्छता का विशेष महत्व है
पवित्रता का ध्यान रखते खास।

श्रद्धा भक्ति से हम इसे मनाते
सात्विक भोजन ही आहार है।।
जब छठ का शुभ दिन आता
दिल में उमंग उत्साह भर जाता।।

अमीर-गरीब या उच्च-नीच का
जाति-धर्म का भेद मिट जाता।
सभी जन मिलकर तैयारी करते
आपस में बनकर परिवार हैं।।

गली-मोहल्ले को लोग सजाते
एकजुट होकर हम घाट बनाते,
छठ व्रतियों की सुविधा की खातिर
अपनी पलकों पर उन्हें बैठाते।

छठ सामाजिक सौहार्द बढ़ाता
सिखाता कुशल व्यवहार है।।
यह लोक आस्था का महापर्व है
सूर्य उपासना में छिपा मर्म है।।

परोपकार से बढ़कर धर्म न दूजा
भारतीय होने पर हमें गर्व  है।

जेनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’ 

म. वि. बख्तियारपुर पटना

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