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बिंदु अग्रवाल-ऐ लड़कियों सुनो

ऐ लड़कियों सुनो…!

तुम खुद अपनी पहचान बनो,

तुम खुद अपना अरमान बनो,

न ढूँढ़ो कहीं किनारा तुम,

तुम खुद अपना आसमान बनो।

न चूड़ी, कंगन, हार चुनो,

तुम साहस से श्रृंगार करो।

आँखों में नूतन ख़्वाब बुनो,

तुम एक नया नवगान बनो।

तेरे दम से ही यह धरती है,

तेरे दम से अंबर चमक रहा।

गर वक्त पड़े तो बनो दिवाकर,

वक्त पड़े तो चाँद बनो।

गर अन्याय का हो सामना,

दुर्गा का अवतार धरो।

जब मानव दैत्य रूप धर आए,

तुम काली का प्रहार बनो।

पर अपने संस्कारों को तुम,

सदा सहेजे रखना।

ढाल बनो परिवार की तुम,

तुम गुरुओं का अभिमान बनो।

ऐ लड़कियों सुनो….!

तुम खुद अपनी पहचान बनो।

बिंदु अग्रवाल

शिक्षिका

मध्य विद्यालय, गलगलिया

किशनगंज, बिहार

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