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मनहरण घनाक्षरी- जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’

Jainendra

Jainendra prasadRavi

विद्यार्थी जो जीवन में

करते न मेहनत,

सदा पग-पग पर,

भोगें खामियाजा हैं।

दुनिया में कई लोग

कर्ज में हैं डूबे हुए,

जीने का तरीका देख,

लगे महाराज हैं।

संतति जो बुजुर्गों की,

करते हैं सेवा नहीं,

जनाजा निकालते हैं,

ले के बैंड बाजा हैं।

कुछ बीती बातों पर

देते हम ध्यान ज्यादा,

जान कर पूछते हैं,

जैसे लगे ताजा है।

जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’
मध्य  विद्यालय, बख्तियारपुर, पटना

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