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हिंदी भावों रत्ना प्रिया

हिंदी

भावों की उद्गार है हिंदी ,

भाषा का संसार है हिंदी ।

सरस भावपूर्ण तुक व छन्द है ,

व्याकरण सम्मत पूर्ण बंध है ,

हिंदी हिंद की परिभाषा है ,

सर्वसम्मत सर्वसुलभ भाषा है ,

शब्दों का भंडार है हिंदी ।

भाषा का संसार है हिंदी ।

ज्ञान-विज्ञान व समस्त कलाएँ ,

गुढ.-विज्ञान व लोक कथाएँ ,

हिंदी सरलता से समझाए ,

गुप्त पहेली शीघ्र सुलझाए ,

भाषा पर उपकार है हिंदी ।

भाषा का संसार है हिंदी ।

ब्रज, अवधी और अन्य बोलियाँ ,

भाषाओं की समूह टोलियाँ ,

हिंदी से सभी अनुप्राणित है ,

स्नेह-भाव से सदा सिंचित है ,

भारोपीय परिवार है हिंदी ।

भाषा का संसार है हिंदी ।

भारतेंदु से चल कर आई ,

आधुनिक युग तक दौड़ लगाई ,

चले अहर्निश गतिमान निरंतर ,

नित नूतन सृजन को प्रेरित कर ,

हर युग का विस्तार है हिंदी ।

भाषा का संसार है हिंदी

रत्ना प्रिया

ार।रत्न

रत्ना प्रिया

शिक्षिका (11 – 12)

उच्च माध्यमिक विद्यालय माधोपुर

चंडी ,नालंदा

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