बालिका दिवस — परंपरा और प्रगति का संगम उमेश कुमार सिन्हा क्यों ? मनाते हैं दिवस आज, यह बात समझना[...]
Category: काव्य लेखन
चेतना का शंखनाद – धर्मेंद्र कुमार ठाकुरचेतना का शंखनाद – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर
चेतना का शंखनाद – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर क्यों आवश्यकता आन पड़ी, इस बालिका दिवस को मनाने की? ये जान लेना[...]
अब कोई बालिका अपना हक न खोए – पुनम कुमारीअब कोई बालिका अपना हक न खोए – पुनम कुमारी
अब कोई बालिका अपना हक न खोए – पुनम कुमारी अब कोई बालिका अपना हक न खोए, अपने सपनों को[...]
उपवास- अर्चना कुमारी उपवास- अर्चना कुमारी
उपवास- अर्चना कुमारी आओ मिलकर हम लें संकल्प ढूँढे उपवास का नया विकल्प अन्न उपवास तो बहुतेरे हैं करते हटाएँ[...]
हम शिक्षक हैं, हाँ हम शिक्षक हैं! – मृत्युंजय कुमारहम शिक्षक हैं, हाँ हम शिक्षक हैं! – मृत्युंजय कुमार
हम शिक्षक हैं, हाँ हम शिक्षक हैं! – मृत्युंजय कुमार हम शिक्षक हैं, हाँ हम शिक्षक हैं, देश के नौनिहालों[...]
बोली बोला, तोल-तोल के – पुनम कुमारीबोली बोला, तोल-तोल के – पुनम कुमारी
बोली बोला, तोल-तोल के – पुनम कुमारी बोली बोला तोल-तोल के, बात कहऽ दिल खोल-खोल के। मीठ बोल से मन[...]
माटी के बोली,मन के हिंदीमाटी के बोली,मन के हिंदी
*माटी के बोली, मन के हिन्दी* मइया के ममता जइसन, मीठ हई हमर बोली, गाँव के गली-गली में, गूँजे रस[...]
किताबों के सफो में मुस्कुराते बालपन दे – अफ़शां बेगमकिताबों के सफो में मुस्कुराते बालपन दे – अफ़शां बेगम
किताबों के सफो में मुस्कुराते बालपन दे – अफ़शां बेगम किताबों के सफो में मुस्कुराते बालपन देखें। चलो स्कूल[...]
ताजा तरीन गज़ल – रखशां हाशमीताजा तरीन गज़ल – रखशां हाशमी
ताजा तरीन गज़ल – रखशां हाशमी है अंधेरों में रौशनी उम्मीद सच में होती है जिंदगी उम्मीद आस जब जब[...]
जिद हमने छोड़ी – ज्योत्सना वर्द्धनजिद हमने छोड़ी – ज्योत्सना वर्द्धन
जिद हमने छोड़ी – ज्योत्सना वर्द्धन जो नहीं उसे पाने की जिद है मुझे, रोज़-रोज़ आईने से टकराने की जिद[...]
