Site icon पद्यपंकज

अनमोल तेरा प्यार है – रत्ना प्रिया

Ratna Priya

रत्ना प्रिया

ओ प्रिय ! तेरी बाँहों में मेरा पूरा संसार है,

बिन मोल ही बिक जाऊँ मैं, अनमोल तेरा प्यार है। 

हो हाथों में हाथ तेरा, जिस पल तुझे पुकारूँ मैं,

जीवन भर का साथ हमारा, अपलक तुझे निहारूँ मैं, 

हर मुश्किल में संघर्षों में, कदम-कदम एक साथ हों,

दुःख के क्षण हों, या सूखे के पल, प्यार भरी हर बात हो,

हृदय के तारों से जुड़ता, इक दूजे का तार है ।

बिन मोल ही बिक जाऊँ मैं, अनमोल तेरा प्यार है। 

प्रीत की इच्छा तेरे संग, दूजा कुछ ना चाहूँ मैं,

चुभे न काँटे तेरे पग में, फूलों-सा बिछ जाऊँ मैं,

साँसों से भी पास हो मेरे, सुकूं हो आभास हो, 

दूरी हो पर दूर नहीं हो, दृढ़ पूर्ण विश्वास हो । 

मैं तुम हो या तुम मैं हूँ अब, दोनों एकाकार हैं ।

बिन मोल ही बिक जाऊँ मैं, अनमोल तेरा प्यार है। 

इन कंधों पर सो जाऊँ मैं, दो पल हों सुख-चैन के,

तुम चुप हो औ मैं चुप हूँ, नयनों की भाषा नैन के,

मुसकाऊँ तो फूल झरें व गाऊँ तो मुसकाओ तुम, 

बंशी की धुन पे थिरकूँ मैं, वेणुधर बन जाओ तुम,

मुझको तेरी प्रीत मिली, हर पल तेरा आभार है ।

बिन मोल ही बिक जाऊँ मैं, अनमोल तेरा प्यार है। 

स्पर्श से तेरे इस तन का, कण-कण झंकृत हो जाए,

तेरी स्नेहादृष्टि से श्रृंगार अलंकृत हो जाए,

तुझको भाए वो चाहूँ, बिन तेरे कुछ ना चाहूँ मैं, 

तुम से है खास मेरा पल, हर पल तुझे रिझाऊँ मैं। 

बात प्रीत की, रात प्रीत की, प्रेमपूर्ण व्यवहार है । 

बिन मोल ही बिक जाऊँ मैं, अनमोल तेरा प्यार है। 

जीवन यूँ ही चलता जाए, गिला नहीं शिकायत हो,

आँखें तुझे ढूँढे हर पल, मेरी प्यारी आदत हो,

जब-जब जन्म लें धरती पर, प्रियतम तेरी बाँहे हो, 

छोर कहीं हो, दिशा कहीं पर, इक लक्ष्य की राहें हों,

अमर हो यह प्यार का बंधन, प्रेम दिव्य उपहार है। 

बिन मोल ही बिक जाऊँ मैं, अनमोल तेरा प्यार है। 

रत्ना प्रिया

शिक्षिका (11 – 12 हिन्दी )

उच्च माध्यमिक विद्यालय माधोपुर

चंडी ,नालंदा

1 Likes
Spread the love
Exit mobile version