पिता है तो घर है जिसको पिता नहीं है वो घर बेघर है, जिसको पिता है उसके पास रोटी है[...]
Category: Bhawna
प्रज्ञा निखार- राम किशोर पाठकप्रज्ञा निखार- राम किशोर पाठक
ले ली है अब अपनी, प्रज्ञा निखार। रहते हैं हम होकर, सबसे उदार।। क्षमा दान दूँ अब, तजकर विलाप। रखना[...]
पिता-रूचिकापिता-रूचिका
पिता एक सुरक्षा कवच इस समाज में जो ढाल बन जाते हर मुश्किल में। पिता मार्गदर्शक एक सलाहकार जो सही[...]
मजदूर की मजबूरी-बिंदु अग्रवालमजदूर की मजबूरी-बिंदु अग्रवाल
वो चल पड़ा अपने कर्म के पथ पर लिए अपने हुनर का नूर, अपने घर परिवार से दूर किसी अनजान[...]
गुरु की महिमा-आशीष अम्बरगुरु की महिमा-आशीष अम्बर
गुरु के बिना ज्ञान नही , ज्ञान के बिना कोई महान नही । भटक जाता है जब इंसान, तब गुरु[...]
ऊपर का भगवान चकित है-रामपाल प्रसाद सिंह अनजान ऊपर का भगवान चकित है-रामपाल प्रसाद सिंह अनजान
देव नाथ रत्ना का सपना।सच होगा यह जल्दी इतना।। किसने सोची थीं ये बातें।शीघ्र दिखेगी विस्मित रातें।। सूरज पश्चिम से[...]
Some People are like Sunsets-Ashish K PathakSome People are like Sunsets-Ashish K Pathak
Temporary, breathing, Impossible to hold Onto No matter how badly You want a moment to stay. They arrive quietly soften[...]
बेटियाँ-रूचिकाबेटियाँ-रूचिका
बेटियाँ संघर्षों की नींव पर एक मजबूत महल बनातीं भूत और वर्तमान को परे धकेलकर भविष्य को सुदृढ़ करने में[...]
हरि को लखना है -राम किशोर पाठक हरि को लखना है -राम किशोर पाठक
सबसे इतना ही कहना है। सबसे प्रेमिल ही रहना है।। द्वेष भला क्यों मन में धारे। सबको मिट्टी में मिलना[...]
माँ-रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’ माँ-रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’
जन्म देकर कह रही माँ,पूज लो भगवान को। लग गया आघात पल में,आज तो “अनजान”को।। कर लिया ऐसा अगर मैं,छोड़कर[...]
