Category: Prem

बौद्धिक विचारों के दूत-सुरेश कुमार गौरवबौद्धिक विचारों के दूत-सुरेश कुमार गौरव

बौद्धिक विचारों के दूत अनुभव को अपनी अभिव्यक्ति पर पूरा गर्व का यह अवसर है भाषा-शब्द और भावों के मेल से कुछ कहने का सुअवसर है। सृजन हो चाहे किन्हीं रुपों और साजों में, हृदय में झलकता है नमन इस मंच को सार्थकता लाते और हम सबसे निकटता है। शिक्षा जगत से जुड़ने वाले पारखी […][...]

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नन्हा भईया-नूतन कुमारीनन्हा भईया-नूतन कुमारी

  नन्हा भईया एक है मेरा नन्हा भईया, उसके घुंघराले से बाल, छोटे छोटे पैर हैं उसके, चलता वह मतवाली चाल। उसका हँसना और मुस्काना, मन को बहुत लुभाता है, अपनी तोतली वाणी से वो, मुझको खुश कर जाता है। कभी खींचता मेरी चोटी, मुझको बड़ा सताता है, उसकी शैतानी और मस्ती, मुझको बहुत सुहाता […][...]

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गुदड़ी के लाल-सुरेश कुमार गौरवगुदड़ी के लाल-सुरेश कुमार गौरव

गुदड़ी के लाल दो अक्टूबर को जन्मे थे एक गुदड़ी के लाल नाम का पहला अक्षर भी उनका है लाल बचपन में नदी तैर कर जाते थे वे पढ़ने संध्याकाल पोल लैम्प में ज्ञान थे गढ़ते एक मात्र धोती ही उनका अंग वस्त्र था “कर्म ही पूजा है” मानो उनका अस्त्र था। आजादी के काल […][...]

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माॅं-जैनेन्द्र प्रसाद रविमाॅं-जैनेन्द्र प्रसाद रवि

माॅं मन मंदिर में तुझे बिठाकर, मां चरणों में नबाऊं शीश। तू हीं दुर्गा, मां शारदा, उमा बन कर देना आशीष।। तेरी चरणों में जन्नत है, तेरी गोद में काबा-काशी। तू ही सर्जक सकल जहां की, चाहे गृहस्थ हों या सन्यासी।। तेरी साया में पले बढ़े, पाकर ममता की छांव। उफनती लहरों से पार किया, […][...]

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सत्य अहिंसा के पुजारी-अशोक कुमारसत्य अहिंसा के पुजारी-अशोक कुमार

 अहिंसा के पुजारी गांधी थे पुतलीबाई के संतान, उनको जानता है सारा जहान। सादगी है उनकी पहचान, कर गए काम महान।। गुजरात के पोरबंदर में जन्मे, पुतलीबाई के लाल महान। बचपन का नाम था मोहनदास करमचंद गांधी, बदलाव के रूप में ला दिए आंधी।। गांधीजी के तीन बंदर, बुरा मत देखो, बुरा मत सुनो, बुरा […][...]

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गांधी शिक्षक के मन में हैं-कमलेश कुमारगांधी शिक्षक के मन में हैं-कमलेश कुमार

गांधी शिक्षक के मन में हैं गांधी शिक्षक के मन में हैं। हर शिक्षक के जीवन में हैं। जब सत्य, अहिंसा, कर्मठता का पाठ पढ़ाता है शिक्षक। तब गांधीजी हर बाल मन और कक्षा के कण-कण में है।। गांधी शिक्षक के मन में हैं।। मात-पिता का सेवा करना, सहज भाव से जीवन जीना। अपना काम […][...]

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नव बसंत-प्रीति कुमारीनव बसंत-प्रीति कुमारी

नव बसंत बीत गए दिन पतझड़ के अब नव बसंत फिर से आया, खुशियों से भर आई आँखें जीवन का कण-कण मुस्काया। वृक्षों के पल्लव हरे हुए मधुवन है फिर से इतराया, बागों में महक उठी कलियाँ है कोंपल-कोंपल हर्षाया। खेतों में हलधर झूम-झूम वसुधा के मन को हर्षाया, खुश होकर देखो वसुंधरा ने धानी […][...]

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बेटी पर मुझको नाज़ है-धीरज कुमारबेटी पर मुझको नाज़ है-धीरज कुमार

बेटी पर मुझको नाज़ है मेरी बेटी मेरे सर का ताज है गर्व है मुझे खुद पर की, एक बेटी के हम बाप है। जबसे मेरे घर आई बेटी मेरी दुनिया आबाद है। मेरी बेटी तुझ पर मुझे नाज़ है तुम घर की लक्ष्मी, माँ सरस्वती के रूप में, हर घर में बेटी तू विद्यमान […][...]

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बेटी-संध्याबेटी-संध्या

बेटी बेटी मेरी प्यारी-सी, अनमोल और न्यारी-सी। मेरी चाहत मेरा प्यार, बेटी मेरी, मेरा अभिमान। बड़े भाग मेरे जो वो मेरे जीवन मे आई, भाग्य बदल गया सौभाग्य में। जब प्रेरणा आयी, जीवन में खुशियां लायी। जीवन हुआ मेरा गुलजार, हर दिन जैसे हो त्योहार। मेरी चाहत मेरा प्यार, बेटी मेरी मेरा अभिमान। बेटी में […][...]

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बेटी पर है नाज-विवेक कुमारबेटी पर है नाज-विवेक कुमार

बेटी पर है नाज बेटी पर है नाज, बेटी ही विश्वास, बेटी घर की साज, करती है सब काज, दो कुलों को संवारती है बेटी, पापा की पाग सजाती है बेटी, उनके है रूप अनेक, हर रूपों में रम वो जाती, जीवन में मिले हर रोल, बड़ी संजीदगी से निभाती, हर दुःख दर्द सह जाती, […][...]

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