शीर्षक – गौरैया
छोटी सी प्यारी यह चिड़िया,
कहलाती है वह गौरैया ।
फुर्र – फुर्र करके आती है,
फुर्र से वह उड़ जाती है ।
विश्व गौरैया दिवस आया अलबेला,
बीस मार्च का दिन शुभ – बेला ।
घर आंगन को चहकाती है,
फिर इधर – उधर भाग जाती है ।
घास – फूस का बनाती घोंसला,
मुंडेरे पर डाले वह डेरा ।
वास्तुकला घोंसले की देखकर,
हर कोई अचरज में पड़ गया ।
जैव – विविधता संग पर्यावरण बचाओ,
संरक्षण इसका कर अपना फर्ज निभाओ ।
गौरैया पक्षी है अनमोल,
सारा जग गाए यही बोल ।
आशीष अम्बर
( विशिष्ट शिक्षक)
उत्क्रमित मध्य विद्यालय धनुषी
प्रखंड – केवटी
जिला – दरभंगा
बिहार
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