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चित्रा छंद – रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’ 

शुभ भोर देख कर खग जागे। 

डाली तरुवर पर से भागे।।

विश्वास ध्यान अब है भू पर।

खाद्यान्न प्राण भरते छूकर।।

जब भूख विवश करता तन को।

करते सहमत अपने मन को।।

खाते खग मनभर उड़ जाते।

दिखते पथ प्रियवर मुड़ जाते।।

मस्ती दिन भर रहते करते।

आगत सुख-दुख मिलकर सहते।।

अतिशय ठिठुरन खल आ जाती।

चह-चह कलरव धुन खा जाती।।

कुछ त्याग प्राण खग कर जाते।

दुर्काल देखकर डर जाते।।

ताकतवर खग जग जाते हैं।

तजकर घर प्राण बचाते हैं।।

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रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’ 

पूर्व प्रभारी प्रधानाध्यापक 

मध्य विद्यालय दरवेभदौर 

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