हे माहेश्वरी।
कोटि सूर्य की प्रभा , त्रैलोक्य तू विहारिनी,
जगदम्बा तू स्वयं प्रभा, है कर्म की प्रकाशिनि।
तू दुष्ट दलन कर महि ,को धर्म से सवांरती,
इहलोक के कल्याण को, त्रिशूल बज्र धारिणी।
है कोटि कोटि है नमन, सुरेश्वरि महेश्वरी!
भवानी माँ तू शूल हर, जीवन के सब समूल हर,
प्राकट्य तेरा है सुखद, तू ताप भय निवारिणी।
तेरे रूप तो असंखय हैं , हर रूप में अनंत है,
हे अर्पणा तपस्विनी, हे महिषासुर मर्दिनी।
है कोटि कोटि है नमन, सुरेश्वरि महेश्वरी!
शुम्भ और निशुम्भ बध, धरा की पापनाशिनी,
हे माँ तू है ममतामयी, तू प्रेम से बिहारिणी।
कण में मन में बास कर, जीवन का तू श्रृंगार कर,
सृष्टि के उत्थान को असंख्य रूप धारिणी।
है कोटि कोटि है नमन, सुरेश्वरि महेश्वरी!
महातपा पुकारता, निरीह भक्त इस धरा,
तू सत्य के प्रकाश में, जया सदा विहारिणी।
मतांगमुनिपूजिता माहेश्वरी सुरेश्वरि,
हे वैष्णवी तू आ धरा असंख्य कंठ पाणिनी।
है कोटि कोटि है नमन, सुरेश्वरि महेश्वरी!
कोटि कोटि कंठ से, यशगान माँ श्रवण करो,
भक्त हैं पुकारते ,माँ संतति वरण करो।
हैं अश्रुधार प्रेम के , प्रसन्न हो ग्रहण करो,
ले गोद में बिठा हमें, दोष को शमन करो।
है कोटि कोटि है नमन, सुरेश्वरि महेश्वरी!
जननी तू भोली है अति, हमें न छोड़ना कभी,
हम हैं शरण में माँ तेरे, तू मुख न मोड़ना कभी।
कोटि कोटि है नमन, कोटिशः प्रणाम है,
हे माँ तुम्हारे पास में, आनंद का प्रकाश है।
है कोटि कोटि है नमन, सुरेश्वरि महेश्वरी!
स्नेहलता द्विवेदी ‘आर्यों ‘
उत्क्रमित कन्या मध्य विद्यालय शरीफगंज कटिहार

