राम रमन कर कण कण में
हे राम रमन कर कण कण में,
अब आन बसो तुम जन गण में,
आनंद हो प्रतिपल जीवन में,
मर्यादा पालन तन मन में।
पुरुषोत्तम तुम अविनाशी तुम,
इस वसुधा के सुखराशी तुम,
अनंत सहज दुखनाशी तुम,
जीवन के पथ के बासी तुम।
हे राम तुम आ जाओ जग में,
आकर अब छा जाओ जग में,
मर्यादा बन आओ जग में,
पुरुषोत्तम हो आओ जग में।
तुम आकर सहज विधान करो,
जीवन का अब सम्मान करो,
तुम धर्म ध्वजा का मान करो,
कण मन में जीवन प्राण करो।
स्नेहलता द्विवेदी “आर्या”
उत्क्रमित कन्या मध्य विद्यालय शरीफगंज कटिहार
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