बजाते हैं सब देखो ढोल।
फाग क्या होती अम्मा बोल।।
सभी जो करते हैं हुड़दंग।
तभी तो जो जाता हूँ तंग।।
सभी के ऐसे होते ढंग।
देखकर आता हमें उमंग।।
जरा अपने मुख को तुम खोल।
फाग क्या होती अम्मा बोल।।
बुरा मत मानो कहते यार।
सभी का सुंदर लगा विचार।।
दिखाते हैं दूजे से प्यार।
कभी हैं ताने देते मार।।
सभी करते हैं बातें गोल।
फाग क्या होती अम्मा बोल।।
चढ़ाएँ लगते सारे भंग।
फड़कते देखो उनके अंग।।
सभी हैं डाले तन पर रंग।
कहीं अब छिड़ मत जाए जंग।।
लिए सब रंगों को है घोल।
फाग क्या होती अम्मा बोल।।
रचनाकार:- राम किशोर पाठक
प्रधान शिक्षक
प्राथमिक विद्यालय कालीगंज उत्तर टोला
बिहटा, पटना, बिहार।
संपर्क – 9835232978
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