फिर पन्द्रह अगस्त
देश प्रेम का परचम लहराया।
जय हिंद के नारों से
गुंजयमान हुआ भारतवर्ष
भारत देश महान कहलाया।
केवल ध्वज फहराकर
अपने कर्तव्यों के निर्वहन की
बात हुई
देश के हितों की बात कहाँ
किसी को समझ आया।
स्वार्थ की राजनीति में
हर दल और हर नेता लगे हैं।
कुर्सी के लिए कितने खेल
बनते और बिगड़ते हैं।
राष्ट्र की बात सबसे पिछले पन्ने पर
अपनी बारी की प्रतीक्षारत नजर आया।
सफेदपोश भ्र्ष्टाचार
देश को दीमक की तरह खोखला कर रहा
हमारा देश दुश्मन से पहले
अपने देश के गद्दारों से लड़ रहा
80वाँ स्वतंत्रता दिवस
तंत्र के सामने बेबस नजर आया।
धर्म के नाम पर होती है लड़ाई
भूख हड़ताल ,अनशन,
धरना प्रदर्शन हर जगह देता दिखाई।
गरीबों के होते शोषण से
व्यवस्था भी कहाँ कभी छुटकारा पाया।
फिर पन्द्रह अगस्त आया
हर तरह जय हिंद का परचम लहराया।
रूचिका
प्रधान शिक्षक
राजकीयकृत प्राथमिक विद्यालय कुरमौली गुठनी सिवान बिहार

