Site icon पद्यपंकज

मां की ममता -हर्ष नारायण दास

शीर्षक- मां की ममता
मां — मेरा पहला संसार।
सदा देती खुशियां अपार।
मां का प्रेम अपनी सन्तान के लिए ,
होता है गहरा और अटूट।
अपनी सन्तान के लिए सदा,
मेहनत करती भरपूर।
मां की महिमा है धन्य धरा पर,
मां से ही है सृष्टि का सृजन।
त्याग, समर्पण ही है इसका भूषण ।
बच्चों पर लुटाती है जान हरदम ।
कभी डांटती,कभी पुचकारती।
कभी करती है आलिंगन।
हर बच्चों की पहली पुकार होती है मां।
ममता की देवी होती है मां।
बच्चों के राहों पर फूल बिछाती है मां।
खुद कांटों पर सो जाती है मां।
पुत्र हो सकता है कुपूत,
पर मां न होती कभी कुमाता है।
मां की सेवा जो करता है,
वो सदा सुखी रहता है।।
प्रेषक हर्ष नारायण दास
फारबिसगंज
जिला – अररिया।
बिहार।

0 Likes
Spread the love
Exit mobile version