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हम,चाची,दादी,नानी रे… नीतू रानी


अ साए अनार आ साए आम होय छै
इ साए इमली खट्टा होयछै रे,
नुनू रे ई साए होयछै ईख सेअ
जैसे चीन्नी ,शक्कर बनै छै रे।

उ साए होयछै उल्लू सेअ  उल्लू केअ दिन में नै सुझै रे
नुनू रे ऊ साए होयछै ऊन सेअ
जैसे शूटर , टोपी बनै छै रे।

ऋ साए होयछै ऋषि सेअ जिनका संत तपस्वी कहै छै रे,
नुनू रे ए साए होयछै एड़ी सेए
जैमें तोहर फूआ पायल पिन्है छौ रे।

ऐ साए होयछै ऐनक जकरा तोहर दादा चेश्मा कहै छौ रे,
नुनू रे ओ साए होयछै ओखली सेअ
जैमें तोहर दादी धान कुटै रहौ रे।

औ साए होयछै औरत ,औरत हम ,चाची ,दादी ,नानी रे ,
नुनू रे अं साए होयछै अंगूर
अंगूर खट्टा, मीठा, करिया, हरका होयछै रे।

अ: के जगह छलै खाली सेअ
सब मिलके बजा ताली रे,
नुनू रे ताली बजेभी घर सेअ एतौ दौड़ल
स्कूल तोहर बहिन लाली रे।

क साए होयछै कबूतर,कबूतर
शाकाहारी पक्षी रे ,
नुनू रे ख साए होयछै खरगोश
जे दौड़ै में बड़ तेज रे।

ग साए होयछै गमला सेअ
जैमें  तोहर चाची तुलसी लगेलकौ रे
नुनू रे घ साए होयछै घर सेअ
जैमें अपना सब मिलकेअ रहै छी रे।

ङ के जगह छलै खाली सेअ
सब मिलके बजा ताली रे,
नुनू रे ताली बजेभी जब राएत में
आगू‌ सेअ साँप छुछून्दर भागतौ रे।
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