दादा-दादी दिवस-उमेश कुमार सिन्हा दादा-दादी की बचपन की बातें खूब मुझे याद आती हैं, गाँव में जाकर उनके संग खुशियाँ[...]
Category: दिवस
हमारी हिंदी – पुरुषोत्तम कुमारहमारी हिंदी – पुरुषोत्तम कुमार
हमारी हिंदी- पुरुषोत्तम कुमार सदस्या है यह भारोपीय भाषा परिवार की। कविता उत्थान, उत्कर्ष, सत्कार और संस्कार की। आर्य भाषा[...]
हिंदी—सिर्फ एक दिवस नहीं-रिन्जु कुमारीहिंदी—सिर्फ एक दिवस नहीं-रिन्जु कुमारी
हिंदी को केवल हिंदी दिवस पर, याद करना भी कैसी विडंबना है, जो हर धड़कन में बसती है, उसे एक[...]
मित्रता-आशीष अम्बरमित्रता-आशीष अम्बर
मित्रता है प्रकृति की अनमोल उपहार, पूरे जग ने भी किया है इसे स्वीकार । है यह सब रिश्तों से[...]
दोस्ती-रूचिकादोस्ती-रूचिका
दोस्ती नही कभी आजमायी जाती, ये तो बस आपस में निभाई जाती। ऊंच नीच का फर्क नही है दोस्ती में[...]
मित्र-रूचिकामित्र-रूचिका
दवा,दुआ,इल्तिज़ा में उठे जिसका हाथ है, वह मित्र है जो जुदा होकर भी साथ है। जो मन की भित्ति को[...]
पिता-रूचिकापिता-रूचिका
उम्र के पायदान दर पायदान चढ़ते पिता पहले से थोड़ा अधिक सुस्ताते हैं मगर जिद पर अड़े हुए वह उम्र[...]
पिता-गिरीन्द्र मोहन झापिता-गिरीन्द्र मोहन झा
परमपिता परमेश्वर हैं, हम सब हैं उनकी संतान, उन्हीं की अनुकम्पा से, हम सब सदा क्रियमाण । सबसे पहले परमपिता[...]
पिता-ब्यूटी कुमारीपिता-ब्यूटी कुमारी
जिम्मेदारियों की बोझ लिए कंधे पर, हर मुसीबत में मुस्कान है पिता। हमारा अरमान हमारी पहचान, धरती अंबर और जहान[...]
माँ-रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’ माँ-रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’
जन्म देकर कह रही माँ,पूज लो भगवान को। लग गया आघात पल में,आज तो “अनजान”को।। कर लिया ऐसा अगर मैं,छोड़कर[...]
