मंजिल की तलाश हैं,
सपनो की आश है।
राह भी कितनी कठिन है,
फिर भी, मन में विश्वास है।
समय ने मुझे सिखाया,
धैर्य सबसे बड़ा दमदार है।
जो हारकर भी मुस्कुराता है,
वही असली जीत का हकदार है।
मंजिल कितनी भी दूर हो,
थकना मुझे मंजूर नही।
पर्वत कितना भी ऊँचा हो,
डरना मुझे मंजूर नहीं है।
किसी ने कहा- “रुक जाओ अब”,
मैंने कहा – “सफर अभी बाकी है”।
हर गिरना मुझे सिखाया,
जीत का असर अभी बाकी हैं।
इसलिए ऐ मेरे मन, तू थकना नहीं,
हालातों से कभी डरना नहीं।
मंजिल उसी को मिलती हैं,
जो सपनों की राह से मुड़ता नहीं।
मुन्नी कुमारी
प्रधान शिक्षिका
प्राथमिक विद्यालय मोहनपुर मुशहरी
प्रखण्ड- झंझारपुर, मधुबनी
0 Likes

