आया मस्ती का दिन पढ़ाई से मिल गई छुट्टी,
जब से आया इम्तिहान गुरुजी पिलाते थे घुट्टी।
हुई परीक्षा खत्म पढ़ाई की नहीं है चिंता,
रात-रात भर जाग याद किया प्रश्न-कविता।
रोज खेलेंगे खेल करेंगे खूब सैर- सपाटे,
पढ़ाई के लिए पिताजी से मिलेंगे नहीं अब डांटें।
जाएंगे बाजार बनाकर रोज नए-नए बहाने,
सोएँगे चादर तान सुबह और शाम मनमाने।
यार-दोस्तों के साथ घूमने की मिली आजादी,
डीजे में पर थिरकेंगे जब होगी भैया की शादी।
बागानों में बैठ सुनेंगे कोयल की मीठी बोली,
घूमने जाएँगे कश्मीर सभी मिलकर हमजोली।
कुछ दिनों के बाद जब परीक्षा फल आएगा,
मूल्यांकन के पश्चात विद्यालय भी खुल जाएगा।
नए सत्र में नए पाठ बहुत सीखना-पढ़ना है।
बना कर नया मुकाम जीवन में आगे बढ़ाना है।
नए-नए रोज पाठ-भाषा-शब्द जो सीखते हैं,
करते जो भूल सुधार सदा वही आगे बढ़ते हैं।
जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’

