डालती रंग हैं- अरुण छंद होली गीत
पीसकर, सिल सदा, शिव पिए भंग हैं।
पार्वती, रूद्र को, डालती रंग हैं।।
नेत्र हैं, शिव किए, लाल पीला जहाँ।
रंग नव, भर रही, हिम सुता है वहाँ।।
भंग के, ढंग से, शैलजा तंग हैं।
पार्वती, रूद्र को, डालती रंग हैं।।०१।।
चंद्रमा, स्याह हैं, छिप रहें रंग से।
धुल रही, रंग भी, जल बहे गंग से।।
कामरिपु, सर्वदा, ही उमा संग हैं।
पार्वती, रूद्र को, डालती रंग हैं।।०२।।
बासुकी, शांत हैं, अंग ढीला हुआ।
प्रेम के, धार से, चित शिवा का छुआ।।
नेह से, जो बनी, अर्ध शिव अंग हैं।
पार्वती, रूद्र को, डालती रंग हैं।।०३।।
गीतकार:- राम किशोर पाठक
प्रधान शिक्षक
प्राथमिक विद्यालय कालीगंज उत्तर टोला, बिहटा, पटना, बिहार।
संपर्क – 9835232978
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