राम जन्म- सार छंद गीत
अवधपुरी के राजमहल में, हर्षित सब नर-नारी।
बाल रूप में ब्रह्म स्वयं ही, आए बन अवतारी।।
त्रेता युग में दशरथ राजा, चौथे पन में आए।
यज्ञ पुण्य से पुत्र रूप में, ब्रह्म गोद में पाए।।
कौशल्या नंदन की फिर तो, गूँज उठी किलकारी।
बाल रूप में ब्रह्म स्वयं ही, आए बन अवतारी।।०१।।
भूमि भार को हरने आए, धर्म ध्वजा लहराने।
मर्यादा का पाठ पढ़ाने, अपना वचन निभाने।।
राजमहल की शोभा बनकर, छाए अवध बिहारी।
बाल रूप में ब्रह्म स्वयं ही, आए बन अवतारी।।०२।।
कमल नयन प्रभु श्याम वर्ण के, पीत वसन तन सोहे।
मृदुल हँसी से सबके मन को, पल भर में जो मोहे।।
नारायण की कृपा मिली तो, हम-सब हैं आभारी।
बाल रूप में ब्रह्म स्वयं ही, आए बन अवतारी।।०३।।
गीतकार:- राम किशोर पाठक
प्रधान शिक्षक
सियारामपुर, पालीगंज, पटना, बिहार।
संपर्क – 9835232978
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