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हिंदी दिवस रामपाल प्रसाद सिंह

हिंदी दिवस

शिखर हिमालय से भी ऊॅंचा,
हिंदी तुमको पाऊॅं मैं।
तभी कहाऊॅं हिंदी भाषी,
गुरुता जग समझाऊॅं मैं।।

वेद पुराणों की परिभाषा,
सरल बनाने तू आई।
पूर्वज का इतिहास बताकर,
विश्व पटल पर तू छाई।
शहर शिकागो साक्ष्य लिए है,
किस-किस को बतलाऊॅं मैं।
शिखर हिमालय से भी ऊॅंचा,
हिंदी तुमको पाऊॅं मैं।

कालांतर से चलकर आई,
ठोकर भी भरपूर मिली।
बाहर की भाषा आई पर,
उनसे तू मजबूर मिली।।
सत्य मैक्स मूलर का पढ़कर,
भाषा पर इठलाऊॅं मैं।।
शिखर हिमालय से भी ऊॅंचा,
हिंदी तुमको पाऊॅं मैं।

हिंदी तू सदियों से हमको,
एक सूत्र में गाॅंथ रही।
उर्दू छोटी बहन साथ में,
बनी तुम्हारी गाॅंठ रही।।
जियो और जीने दो सबको,
कथन विश्व पहुॅंचाऊॅं मैं।
शिखर हिमालय से भी ऊॅंचा,
हिंदी तुमको पाऊॅं मैं।

हिंदी के घर हुई लड़ाई,
क्षेत्रवाद सर उठा रहा।
दक्षिण उत्तर टकरावों ने,
दिल में काॅंटा चुभा रहा।।
अब तो जागो हिंदुस्तानी,
घर की बात बताऊॅं मैं?।।
शिखर हिमालय से भी ऊॅंचा,
हिंदी तुमको पाऊॅं मैं।


रामपाल प्रसाद सिंह अनजान
नियम से हटकर एक और प्रेम आग्रह
की प्रतीक्षा में।

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