अर्द्धनारीश्वर
शिव-उमा के कल्पित रूप, अर्द्धनारीश्वर है,
प्रकृति है समष्टि में अधिष्ठाता अधीश्वर है ।
स्नेहमयी दो नयन, एक रसमयी दूजा विकराल
एक भुजा की त्रिशूल शोभा, दूजा अलक्तक लाल
जटाजूट में गंङग् वास है, अविरल संजीवन धार
विषधर गलमाल लपेटे, दूजे में वैजन्ती हार
त्रिनेत्र में धधक रही ज्वाला, शीतल सुरेश्वर है ।
शिव-उमा के कल्पित रूप, अर्द्धनारीश्वर है ।
एक हृदय दूजा स्पंदन, परस्पर बसते हैं प्राण
शिव हैं औघड़दानी, तो शक्ति देती है वरदान
त्याग की मनोभूमि निराली, सद्गृहस्थ का दर्शन
संन्यास के विरक्त चित पर, स्नेह सुधा का वर्षण
जगदीश्वरी है वामांग, शोभित जगदीश्वर है
शिव-उमा के कल्पित रूप, अर्द्धनारीश्वर है ।
एक को भाये भस्म-भभूत, दूजा को शीतल चंदन
साधना की गंभीरता, कोमलता का अभिनंदन
तप का प्रखर भाव निहित, नवजीवन का संतुलन
विरक्ति में राग भरा, विश्वमोहिनी का सम्मोहन
भुवनेश्वरी का मधु हास, मोहित भुवनेश्वर है
शिव-उमा के कल्पित रूप, अर्द्धनारीश्वर है ।
रत्ना प्रिया
शिक्षिका (11 – 12 हिन्दी )
उच्च माध्यमिक विद्यालय माधोपुर
चंडी ,नालंदा

