उठो तुम! हुंकार भरो!
अन्याय का प्रतिकार करो!
भेद कर घन तिमिर को,
चहुंँओर प्रकाश भरो!
छवि तोड़ तुम अबला की,
जियो पल-पल अब न मरो!
अब तक थीं चूड़ियाँ शोभती,
उन कर में कलम कटार धरो!
तोड़ पायल की बेड़ियाँ,
नित नव पथ पर पाँव धरो!
पोंछ आँसू आँख के उनमें,
इंद्रधनुषी रंग भरो!
नाप लो पग से गगन धरा,
वामन का तुम रूप धरो!
आकाश समा लो मुट्ठी में,
आओ उठो! सिंह नाद करो!
लिखो अपना नव अध्याय,
मन में नव उन्माद भरो!
उठो! आर्य पुत्रियों! उठो,
आओ उठो! शंख नाद करो!
डाॅ उषा किरण
प्रधान शिक्षक
नव सृजित विद्यालय बवरिया
पहाड़पुर, पूर्वी चम्पारण
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