Category: Raudra

जल जीवन हरियाली-प्रिती कुमारीजल जीवन हरियाली-प्रिती कुमारी

जल जीवन हरियाली  है चहुँ ओर हरियाली और चली हवा मतवाली, धरती अम्बर सब डोले जब बाग में पपीहा बोले । जब पुरबा ले अंगराई नभ में बदरी छाई, फिर झूम के बादल बरसा और तृप्त हो गई वसुधा । जंगल में मयूरा नाचे मन उसके पीछे भागे , जल जीवन और हरियाली करना इनकी […][...]

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कैसी व्वस्था-संयुक्ता कुमारीकैसी व्वस्था-संयुक्ता कुमारी

कैसी व्यवस्था कैसी है हमारे सभ्य समाज की व्यवस्था? कोई कब समझेगा गरीब की अवस्था? आवाज उठाओ हो रहा है अत्याचार। चहुँ ओर से घिरे देखते हैं, हम बन लाचार।। अरे ! मानव हो तुम…तुम पर है धिक्कार। गरीबों को ना सताओ, यह है आपका अपना व्यवहार ।। कभी होता किसानों पर अत्याचार । कभी […][...]

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