तिरंगा है भारत की शान,
इसमें बसती देश की जान।
केसरिया कहता साहस–त्याग,
श्वेत सिखाता सत्य–ज्ञान।
हरा रंग हरियाली बोले,
खेत–खलिहान, वन–उपवन डोले।
अशोक चक्र हर पल सिखाए,
रुकना नहीं, आगे ही बढ़ना बोले।
इस ध्वज तले सोई कुर्बानी,
हर धागे में अमर कहानी।
वीरों ने हँसकर प्राण दिए,
तब पाई हमने ये आज़ादी।
ना झुके कभी ये आन–बान,
ना होने दें इसका अपमान।
हर घर में हो इसका आदर,
हर दिल में बसे इसका मान।
आओ आज ये प्रण हम ठानें,
तन–मन से इसे पहचानें।
कर्म, सेवा, सत्य के पथ पर,
चलकर भारत को महान बनाएं।
विवेक कुमार
भोला सिंह उच्च माध्यमिक विद्यालय, पुरुषोत्तमपुर
कुढ़नी, मुजफ्फरपुर
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