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योग-राम किशोर पाठक

Ram Kishore Pathak

Ram Kishore Pathak

रोग-मुक्त निज तन पाइए।
योग सहज जब अपनाइए।।

दूर भगाओ आलस्य को।
खाना उत्तम है शस्य को।।
सुबह टहलना व्यायाम है।
करना भी प्राणायाम है।।
निज मन को यह समझाइए।
योग सहज जब अपनाइए।।०१।।

तन से मन को है जोड़ना।
व्याधि अंश को है तोड़ना।।
करना प्रतिदिन अभ्यास है।
यह योग बहुत ही खास है।।
ऊर्जित निज तन कर जाइए।
योग सहज जब अपनाइए।।०२।।

शोधन यह करता रक्त को।
ताकत भी भरे अशक्त को।।
सुखमय जीवन का राज है।
बस नित कुछ पल का काज है।।
दो पल तो निकाल लाइए।
योग सहज जब अपनाइए।।०३।।

गीतकार:- राम किशोर पाठक
प्रधान शिक्षक
सियारामपुर, पालीगंज, पटना, बिहार।
संपर्क- ९८३५२३२९७८

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